दरअसल, इन सभी नेताओं ने समय-समय पर दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग की है। इतना ही नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनाव में घोषणा पत्र में वादा किया था कि वे जीतने पर दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देंगे।
आगामी लोकसभा चुनाव में मोदी व दिल्ली से सातों सांसदों को घेरने के लिए आप सरकार ने जो रणनीति बनाई उसमें इन सभी से जवाब मांगा जाएगा कि आखिर उन्होंने पूर्ण राज्य का दर्जा क्यों नहीं दिलवाया। जनता को गुमराह क्यों किया?
वहीं, विधानसभा में कांग्रेस का कोई प्रतिनिधि नहीं है लेकिन आप सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बयानों को आधार बनाने की तैयारी की है कि वे भी मानती हैं कि दिल्ली के पूर्ण विकास के लिए दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देना जरूरी है।
यह एक ऐसा मुद्दा है जिसका न तो भाजपा, न ही कांग्रेस खुलेआम विरोध कर सकती है। आप सरकार ने इसी का फायदा उठाते हुए उन्हें घेरने की तैयारी की है। उधर, विपक्ष में भाजपा के चार विधायक हैं और वे भी आप की चाल को समझ रहे हैं। ऐसे में उन्होंने बिजली, पानी व अन्य मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बनाई है।
स्पष्ट है कि बुधवार को सत्र शुरू होते ही भाजपा विधायक इन्हीं मुद्दों को जोर-शोर से उठाना शुरू कर दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की चर्चा बाद में शुरू करने की आवाज बुलंद करेंगे और संख्या बल में आप के विधायक ज्यादा होने के कारण इन मुद्दों पर चर्चा नहीं करना चाहेंगे। ऐसे में तय है कि सत्र हंगामेदार होगा। हो सकता है कि हर बार की तरह फिर भाजपा विधायकों को बाहर कर दिया जाए।