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Delhi: विधानसभा सत्र 29 नवंबर से, हंगामेदार होने के आसार; जानें क्या होगी सकती है सरकार और विपक्ष की रणनीति

Tue, 19 Nov 2024 06:17 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

विधानसभा नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने विधानसभा के सत्र में प्रश्नकाल रखने की मांग की। इस बाबत विधानसभा अध्यक्ष को पत्र भी लिखा है। 
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दिल्ली विधानसभा - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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चुनावी सरगर्मी के बीच दिल्ली विधानसभा सत्र का एलान किया गया है। यह सत्र 29 नवंबर और 3 दिसंबर को आयोजित किया जाएगा। सातवीं विधानसभा के पांचवें सत्र के रूप में ''शीतकालीन सत्र'' आरोप-प्रत्यारोप वाला होने वाला है। क्योंकि विपक्ष ने अभी से ही तेवर कड़ा कर लिया है। इस दौरान भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच जमकर सियासी तेवर देखने को मिलेगी। इसे लेकर पक्ष और विपक्ष ने राजनीतिक घेरा बंदी करने की तैयारी शुरू कर दी है। सत्ता पक्ष के व विपक्ष के सदस्य एक दूसरे को कटघरे में खड़ा करने की रणनीति तैयार कर रहे है। विपक्ष ने अभी से एजेंडा भी तय कर लिया है।

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दिल्ली विधानसभा का सत्र 29 नवंबर से शुरू होने जा रहा है। हर बार की तरह जहां दिल्ली के विकास के मुद्दे पर जहां आम आदमी पार्टी के विधायक केंद्र सरकार पर ठीकरा फोड़ेंगे वहीं भाजपा वायु प्रदूषण, यमुना की सफाई, जर्जर सड़क, स्वास्थ्य व परिवहन के मुद्दे पर दिल्ली सरकार को कटघरे में खड़ा करने की तैयारी में है। प्रदेश भाजपा मुद्दो को लेकर विधानसभा का घेराव भी कर सकता है वहीं आम आदमी पार्टी के संयोजक व विधायक अरविंद केजरीवाल आगामी विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी का क्या रहेगा एजेंडा उसके रोडमैप की झलक पेश कर सकते है।

उधर, विधानसभा नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने विधानसभा के सत्र में प्रश्नकाल रखने की मांग की। इस बाबत विधानसभा अध्यक्ष को पत्र भी लिखा है। जिसमें कहा है कि इस साल एक बार भी प्रश्नकाल नहीं रखा गया है। लोकतांत्रिक प्रणाली में विधानसभा के सत्रों में ''प्रश्नकाल'' का न रखना जनप्रतिनिधियों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है। 

विधायक अपने निर्वाचन क्षेत्र के लोगों की समस्याओं के प्रति उत्तरदायी होते हैं और यह सदन ही एक ऐसा मंच है जिसके माध्यम से सभी विधायक प्रश्नकाल में अपने अपने क्षेत्र की समस्याओं की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करते हैं और उसके समाधान की मांग करते हैं। यदि सत्र में प्रश्नकाल ही नहीं रखा जाएगा तो विधायक अपनी समस्याओं को कैसे सरकार के सामने उठायेंगे। इसके अलावा अल्पावधिक चर्चा और ध्यानाकर्षण प्रस्तावों को भी विधानसभा की कार्यवाही में शामिल करने और इसमें विधायकों की सहभागिता सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया है।
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नेता प्रतिपक्ष ने मांग की है कि वह लोकतांत्रिक भावनाओं और व्यवस्थाओं का सम्मान करते हुए आगामी विधानसभा सत्र में प्रश्नकाल का प्रावधान सुनिश्चित करवायें ताकि जनप्रतिनिधि के रूप में सदन में उपस्थित सभी विधायकों को अपने-अपने क्षेत्र की समस्याओं को सदन के समक्ष उठाने का अवसर प्राप्त हो सके।
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