दिल्ली विधानसभा चुनाव के परिणाम अगले माह राष्ट्रपति शासन खत्म होने से पहले घोषित कर दिए जाएंगे। चुनाव आयोग के वरिष्ठ सूत्रों के मुताबिक आयोग ने एक खास कारण के चलते ये फैसला कर लिया है।
अंग्रेजी अखबार द इकॉनॉमिक टाइम्स को नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर बताया कि दिल्ली में चुनाव के लिए आयोग के पास अप्रैल तक का समय है। लेकिन आयोग के शीर्ष अधिकारी से जुड़े एक खास कारण के चलते दिल्ली विधानसभा चुनाव 15 फरवरी के भीतर संपन्न कराने कराने सोच रही है।
इस बाबत मंगलवार को मुख्य चुनाव आयुक्त वीएस संपत ने चुनाव आयोग के शीर्ष अधिकारियों से दिल्ली चुनाव के मद्देनजर बैठक की। इस दौरान उन्होंने कहा कि आयोग 15 फरवरी तक दिल्ली विधानसभा चुनाव से संबंधित सबकुछ संपन्न कराने के पक्ष में हैं।
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चुनाव आयोग के सूत्रों के अनुसार इस सप्ताह चुनाव की तारीखों पर अंतिम फैसला लेकर तारीखों की घोषणा कर देगा। जानकारी के मुताबिक 70 सीटों के लिए चुनाव एक ही चरण में होंगे।
गौरतलब है कि पिछले साल 14 फरवरी को 49 दिनों की केजरीवाल सरकार के इस्तीफे के बाद पूरे साल दिल्ली में कई तरह की संभावनाएं बनती रहीं। अंततः सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद दिल्ली विधानसभा भंग कर राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया। अगामी 17 फरवरी को दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगे छह महीने पूरे हो जाएंगे।
अब मुख्य चुनाव आयुक्त वीएस संपत का कहना है कि किसी भी विधानसभा के भंग होने के छह महीने के भीतर वहां चुनाव करा लेना उचित है। इसलिए आयोग 15 फरवरी तक चुनाव संपन्न कराने के पक्ष में है। चुनाव की तारीखों की घोषणा होने के साथ ही दिल्ली में आचार संहिता प्रभावी हो जाएगी।
रिटायर होने से पहले करना चाहते हैं अंतिम घोषणा
मुख्य चुनाव आयुक्त वीएस संपत 15 जनवरी को सेवानिवृति होने जा रहे हैं। जानकारी के मुताबिक वह अपने सेवानिवृति से पहले दिल्ली चुनावों की घोषणा कर देना चाहते हैं।
वीएस संपत के मुताबिक वह किसी भी स्तर पर कोई गलत काम करके नहीं जाना चहाते। उनके मुताबिक राष्ट्रपति शासन के छह महीनों के भीतर चुनाव आयोजित करा लेना चाहिए। इसलिए दिल्ली में भी राष्ट्रपति शासन छह महीने से आगें बढ़े, इससे पहले चुनाव करा लिए जाएंगे।
गौरतलब है कि अरविंद केजरीवाल की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए दिल्ली में विधानसभा भंग कर चुनाव कराने के निर्देश दिए थे।