फांसी घर नहीं टिफिन रूम था: विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता
विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने सत्र की शुरुआत में ही इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने कहा कि नेशनल आर्काइव के ऐतिहासिक नक्शे से साफ हुआ कि जिसे फांसी घर बताया गया वह दरअसल टिफिन रूम की लिफ्ट थी। विजेंद्र गुप्ता ने तंज कसते हुए कहा कि जहां विधानसभा में बहस होती है वहां फांसी घर कैसे हो सकता है। यह सवाल हर किसी के मन में है। उन्होंने आप पर दिल्लीवासियों को गुमराह करने का आरोप लगाया और कहा कि इसकी सच्चाई की जांच होगी।
अगर फांसी घर का दावा झूठा निकला तो इस जगह का संरक्षित दर्जा खत्म कर दिया जाएगा। विजेंद्र गुप्ता ने यह भी खुलासा किया कि जिसे आप ने सुरंग बताया था वह कोई गुप्त रास्ता नहीं बल्कि वेंटिलेशन के लिए बनाया गया डक्ट है। उन्होंने इतिहासकारों के हवाले से कहा कि उस समय सीमित संसाधनों में भवनों में वेंटिलेशन के लिए ऐसी डक्टिंग आम थी। यह सिर्फ दिल्ली विधानसभा में ही नहीं बल्कि संसद में भी देखने को मिलती है।
नक्शे में ये जगह टिफिन रूम
विजेंद्र गुप्ता ने आगे बताया कि जिस कमरे को फांसी घर कहा गया वहां एक शिलापट्ट भी लगाया गया था जिसमें 9 अगस्त 1942 का जिक्र है। इसे दर्शनीय स्थल बताकर उद्घाटन किया गया लेकिन नक्शे में यह साफ है कि वह टिफिन रूम था। इस कमरे में लकड़ी की लिफ्ट को फांसी का फंदा और ट्रेप डोर बताया गया जबकि वह भोजन लाने-ले जाने के लिए बनाई गई थी। विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि डिप्टी स्पीकर मोहन सिंह बिष्ट का कमरा नक्शे में वायसराय रूम के नाम से दर्ज है और बाकी कमरे मेंबर्स रूम और स्मोकिंग रूम जैसे नामों से हैं।
ये विषय विधानसभा की गरिमा से जुड़ा
भाजपा ने इस मुद्दे को विधानसभा की गरिमा से जोड़ा। विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि शिलापट्ट लगाकर इसे फांसी घर बताना गंभीर मामला है। उन्होंने विपक्ष से इस पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा। विधानसभा के मुख्य सचेतक अभय वर्मा ने भी इस मुद्दे पर चर्चा की थी।
फांसी घर पर बहस समय की बर्बादी : आतिशी
नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने इस बहस का विरोध किया। उन्होंने कहा कि दिल्ली में बिजली, पानी और सड़कों जैसी कई समस्याएं हैं जिन पर चर्चा होनी चाहिए। फांसी घर पर बहस को वे समय की बर्बादी मानती हैं। जवाब में भाजपा ने कहा कि आप के इस झूठ के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाया जाना चाहिए। आतिशी बुधवार को इस मुद्दे पर अपनी पार्टी का पक्ष रखेंगी।