किसके हाथ सत्ता की चाबी लगेगी, यह कल (8 फरवरी) को दोपहर तक तय हो जाएगा। किस पार्टी को क्या मिलेगा और किसे कितना नुकसान हुआ और दावे कितने सटीक बैठे, सब पता चल जाएगा। एग्जिट पोल्स का निचोड़ भी सामने आ गया है। अब तक के सबसे मुश्किल माने जा रहे चुनाव में इस बार आम आदमी पार्टी की अग्निपरीक्षा है, वहीं भाजपा के 27 साल के वनवास पर से भी पर्दा उठेगा। कांग्रेस को भी सांत्वना पुरस्कार मिलने की उम्मीद जगी है। लिहाजा सभी पार्टियों की धड़कने बढ़ी हुई हैं और समीक्षा का दौर खत्म ही नहीं हो रहा है।
वोटिंग प्रतिशत को देखते हुए रणनीतिकार फिलहाल कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं दिखाई दे रहे हैं, क्योंकि पिछले दो चुनाव की तुलना में वोट प्रतिशत कम रहा है। दिल्ली चुनाव के डेटा के अनुसार, 60.54 प्रतिशत ही वोट पड़े हैं। इससे पहले 2008 में इतनी कम वोटिंग हुई थी, तब 57.8 पर्सेंट वोटर बूथ तक पहुंचे थे। 2015 में वोटिंग करीब 67 प्रतिशत हुई थी, तो आप ने 67 सीटों के प्रचंड बहुमत से सत्ता में वापसी की थी। 2020 के विधानसभा चुनाव में 62.59 प्रतिशत वोट पड़े। इसमें भी आप का जादू बरकरार रहा और 70 में से 62 सीटों के प्रचंड बहुमत से तीसरी बार सरकार बनी।
केजरीवाल के खिलाफ हर तबके में दिखी नाराजगी : चंद्रचूड़ सिंह
राजनीतिक विज्ञान के प्रोफेसर चंद्रचूड़ सिंह की मानें तो दिल्ली का जो वोटिंग पैटर्न दिखा, वह त्रिशंकु वाला ही है। दिल्ली में जातियां भी चुनाव प्रभावित करती हैं और प्रवासी भी। धन बल और निर्धनता भी चुनाव को प्रभावित करते हैं। स्थानीय चुनाव का सही आकलन करना बेहद कठिन है। हालांकि इतना जरूर है कि पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ हर तबके में नाराजगी जरूर देखने को मिली। दिल्ली का चुनाव ऐसा होता है, जिसमें सभी फैक्टर काम करते हैं। किसी के पक्ष में लहर नहीं, होती तो हर तबके में आसानी से दिखती। गवर्नेंस का मामला रहा। सरकार को काम नहीं करने दिया जा रहा है। सत्ता पक्ष के विरोध में रोष सभी तबकों में दिखा। लिहाजा केजरीवाल से वोट खिसकता जरूर नजर आ रहा है लेकिन ऐसा नहीं है कि उनकी पार्टी ही खत्म हो जाए। उधर, भाजपा के प्रति लोगों का झुकाव जरूर हुआ है। सामाजिक पहलुओं पर विश्लेषण करें तो भाजपा की सरकार बनती दिख रही है।
मध्य वर्ग का कार्ड भाजपा के पक्ष में जाता दिख रहा
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि मध्य वर्ग को खुश करने के फॉर्मूले पर इस चुनाव को कसा जाए तो यह भाजपा के पक्ष में जाता दिखाई दे रहा है। क्यों यूथ वोटर भाजपा के साथ गए हैं, जो महिलाएं आप की तरफ जा रही थीं, उन्हें मनाने में भाजपा कामयाब रही है। उधर कांग्रेस के लिए भी गुड न्यूज है, क्योंकि वोट प्रतिशत पिछले चुनाव में करीब चार प्रतिशत था वह बढ़कर 10 प्रतिशत तक जाने की उम्मीद राजनीतिक विश्लेषक आंक रहे हैं। इसमें मुस्लिम वोटों को कुछ हद तक वापस खींचने में पार्टी सफल रह सकती है। इसी तरह झुग्गी क्लस्टर में भी कांग्रेस सेंध लगाने में सफल रही है। दूसरी तरफ पूर्वांचल वोटर भी बंटे हुए हैं। कुछ पूर्वांचली महिलाओं में यमुना में छठ पूजा की मनाही से भी नाराजगी स्पष्ट तौर पर दिखी। यहां भी भाजपा आप की महिला सम्मान योजना को कुछ हद तक डेंट करने में कामयाब रहीं है।
आप और भाजपा के बीच कांटे की टक्कर : प्रो. एजाज
राजनीतिक विश्लेषक प्रो. तनवीर एजाज कहते हैं कि जब भी वोटिंग प्रतिशत कम होता है तो संभावना सत्ता पक्ष के हक में ही जाती है। इस बार पिछले चुनाव की अपेक्षा वोट कम भी पड़े। दूसरी बात यह है कि अगर कांग्रेस पार्टी का वोट प्रतिशत बढ़ता है तो यकीनन आम आदमी पार्टी को नुकसान होगा। लिहाजा हम कहने की स्थिति में हैं कि आम आदमी पार्टी और भाजपा के बीच कांटे की टक्कर हो जाएगी। इन दोनों पार्टियों में गेम कोई भी जीत सकता है। कांग्रेस बेहतर करती है तो त्रिशंकु सरकार की बातें भी हैं हालांकि इसकी संभावना कम है। इतना जरूर है कि वोट के बंटवारे से भाजपा की सीटें काफी बढ़ेंगी। दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी का वोट प्रतिशत बढ़ेगा। कुछ सीटें भी कांग्रेस के पक्ष में भी जा सकती है।
भाजपा का 50 सीटें जीतकर सरकार बनाने का दावा
मतदान खत्म होने के बाद राजनीतिक पार्टियों का जीत-हार वाला समीकरण दिनभर चला। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने बृहस्पतिवार को इस पर समीक्षा बैठक की। किस बूथ पर किस तरह का मिजाज था और फाॅर्म-17 के आंकड़े क्या कह रहे हैं, इस पर दिनभर माथापच्ची चली। भाजपा ने इस समीक्षा के बाद दावा किया है कि 70 में से 50 विधानसभा सीटें जीतकर पार्टी सरकार बनाएगी। सूत्रों की मानें तो जादुई आंकड़े के आसपास भी पार्टी रहती है तो सरकार बनाने में राजनीतिक समीकरण बिठाकर सत्ता में आएगी। भले ही इसके लिए जोड़तोड़ करने की स्थिति भी क्यों नहीं हो।
दिल्ली भाजपा ने गठबंधन के तहत चुनाव लड़े सभी 70 उम्मीदवारों, उनके चुनाव एजेंट, जिला अध्यक्षों के साथ समीक्षा बैठक की। भाजपा के राष्ट्रीय नेता शिव प्रकाश, चुनाव प्रभारी बैजयंत जय पांडा, सह प्रभारी अतुल गर्ग, प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा और सभी सांसद बैठक में शामिल हुए।
केजरीवाल के भ्रष्टाचार से तंग आई जनता : सचदेवा
बैठक के बाद वीरेंद्र सचदेवा मीडिया से बातचीत में पूरी तरह से जीत को लेकर आश्वस्त दिखे। उन्होंने कहा कि दिल्ली की जनता आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल के भ्रष्टाचार में डूबे अराजक, अकर्मण्य शासन से तंग आ चुकी है। दिल्ली के सभी वर्गों के लोगों ने केजरीवाल विरोधी निर्णायक मतदान किया है। कहा कि दिल्ली विधानसभा चुनाव का नतीजा शनिवार को अप्रत्याशित होगा और भाजपा इस चुनाव में 50 सीटों से अधिक जीतकर सरकार बनाएगी। कहा कि दिल्ली के लोग सरकार के भ्रष्टाचार, अराजकता से परेशान हैं। पेयजल किल्लत और टूटी सड़कों का सामना कर रहे हैं। शीशमहल बनाने वाले के खिलाफ झुग्गियों में भी रोष है। महिलाओं में इस बात को लेकर रोष दिखा कि महिला सम्मान निधि के नाम पर लगातार झूठ बोल रहे हैं। भाजपा की चिंता अब यह है कि उन गरीबों व झुग्गी बस्ती के लोगों को नारकीय जीवन से कैसे उबारे। पार्टी के संकल्प पत्र को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि सरकार को पहले दिन से ही काम शुरू करना होगा।