विधानसभा चुनाव के लिए आप की पहली सूची में बाहरी भारी पड़े हैं। ग्यारह उम्मीदवारों में से छह बाहरी हैं। इन नेताओं ने बीते दिनों कांग्रेस व भाजपा को छोड़कर आप की सदस्यता ली थी। वहीं, तीन मौजूदा विधायकों के टिकट काटकर आप ने सत्ता विरोधी लहर की किसी तरह की आशंका को खत्म करने की रणनीति आजमाई है।
आप के सर्वे में जनता का मूड इन विधायकों के खिलाफ था। इससे माना जा रहा है कि आगे भी आप दूसरे कई मौजूदा विधायकों के टिकट काट सकती है। आप ने खुले तौर पर स्वीकार भी किया है कि उम्मीदवारों का चयन रायशुमारी के आधार पर ही किया गया है। जनता की पसंद टिकट पाने का आधार बनी है।
असल में बीते दिनों आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भाजपा व कांग्रेस के नेताओं को आप की शामिल किया था। इसके बाद से ही संभावना जताई जा रही थी कि आप इन्हें टिकट दे सकती है। आप के सर्वे में पता चला था कि इन नेताओं की जनता में अच्छी पकड़ है। पार्टी रणनीतिकार बताते हैं कि दूसरी पार्टियों के नेताओं को आप में शामिल करवाने का आधार भी सर्वे ही बना था। राजनीतिक मामलों की समिति में भी इस पर विस्तार से चर्चा हुई। इसके बाद जमीनी स्तर पर काम करने वाले उन्हीं नेताओं को टिकट दिया गया, जिनके जीतने की संभावना ज्यादा दिखी।
दो महीने से चल रहा आप का अभियान
दिल्ली प्रदेश संयोजक गोपाल राय के मुताबिक, दो माह में पार्टी ने दिल्ली की जनता से जुड़ने व प्राथमिकताओं को समझने के लिए व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया था। केजरीवाल के नेतृत्व में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने सभी 70 विधानसभा क्षेत्रों में पदयात्राएं कीं। इस दौरान लोगों का फीडबैक लिया गया। ऐसे उम्मीदवारों का तलाशा जा रहा है, जिनमें चुनावी सफलता के साथ अपने क्षेत्र के लोगों के बीच मौजूदगी, शिकायतों का समाधान करवाने की काबिलियत, वंचितों की आवाज बनने का माद्दा व स्थानीय नेतृत्व समेत दूसरे कई मापदंड भी देखे जा रहे हैं।
सत्ता विरोधी लहर की आशंका खत्म करने की कोशिश
आप ने जिन छह बाहरी नेताओं को टिकट दिया है, उनमें कांग्रेस से आप में शामिल वीर सिंह धींगान, जुबेर चौधरी व सुमेश शौकीन और भाजपा से अनिल झा, बीबी त्यागी व ब्रह्म सिंह तंवर हैं। इन नेताओं का कभी अपने-अपने इलाके में मजबूत जनाधार रहा है। दिल्ली की सियासत में आप की एंट्री के बाद इनका सियासी सितारा भंवर में फंस गया था। इसके बावजूद ये अपनी पार्टी के साथ इलाके में सक्रिय रहे और आप में शामिल होकर टिकट लेने में कामयाबी हासिल की।
- चुनावों से पहले आप की इस तरह की मैराथन प्रैक्टिस के पीछे की वजह सत्ता विरोधी लहर की किसी तरह की आशंका को भी खत्म करने की है। इसके लिए बड़े पैमाने पर जमीनी स्तर पर आप सर्वे कर रही है। वहीं, केजरीवाल खुद लोगों के बीच कह रहे हैं कि चुनाव उनके नाम पर लड़ा जा रहा है, लोगों का वोट सीधे केजरीवाल को मिलेगा। इसी आधार पर पार्टी ने तीन मौजूदा विधायकों के टिकट काटे हैं। इससे यह आंशका भी बनी है कि आगे भी बड़े पैमाने पर बदलाव होगा। अभी कई मौजूदा विधायकों के टिकट कट सकते हैं।
भाजपा का एंगल-- आप नेतृत्व ने आत्मविश्वास खोया
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि अरविंद केजरीवाल हताश हैं। पहली सूची में पार्टी के एक भी स्थापित नेता का नाम न होना दर्शाता है कि आप नेतृत्व ने आत्मविश्वास खो दिया है। राजनीतिक दल पहली सूची में अपने बड़े नेताओं के नाम देते हैं और ऐसे में जनता को उम्मीद थी कि इस सूची में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, सत्येंद्र जैन, गोपाल राय का नाम होगा, लेकिन अब साफ है कि पार्टी सत्ता विरोधी लहर से घबराई हुई है।