1980 के मध्य में मीडिया द्वारा पहली बार मतदान के बाद वोटरों की नब्ज टटोलने की कोशिश की गई थी। इसके बाद 1990 के दशक में जैसे-जैसे टेलीविजन का प्रसार होता गया, लोगों के बीच एग्जिट पोल उतना ही लोकप्रिय होता गया। 1998 के लोकसभा चुनावों में लगभग हर प्रमुख समाचार चैनलों ने एग्जिट पोल किए।
इस दौरान भी एग्जिट पोल्स के आंकड़ों में अंदाजा लगाया गया था कि भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी। हालांकि एग्जिट पोल सीट के सटीक आंकड़े नहीं निकाल पाए थे, लेकिन उनकी अंदाजा काफी हद तक अनुमान के आसपास ही रहा। पोल के मुताबिक एनडीए को 214-249 के बीच सीटें और कांग्रेस नीत यूपीए को 145-164 सीटें मिलने का अनुमान था। वहीं असल में एनडीए को 252 और कांग्रेस को 166 सीटें मिली थीं।
अबतक जनता के बीच एग्जिट पोल्स का खुमार चढ़ चुका था। मतदान के बाद लोगों को एग्जिट पोल्स के अनुमान की बेचैनी होती थी। 1999 के चुनाव के एग्जिट पोल्स में एनडीए को 300 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया था और असल में 296 सीटें मिली थीं। यूपीए के लिए 132-150 सीटों का अनुमान था और उन्हें 134 सीटें मिली थीं।
हालांकि 2004 के लोकसभा चुनाव के एग्जिट पोल बेहद निराशाजनक साबित हुए। इस बार एनडीए को दोबारा जनादेश मिलने का अनुमान लगाया था, लेकिन नतीजे आने पर पता चला कि एनडीए 200 सीटों का आंकड़ा भी नहीं छू पाई। इस बार यूपीए को 222 सीटें मिली थीं, जिसके बाद सपा और बसपा के सहयोग से यूपीए की सरकार बनी थी।
इसी तरह एग्जिट पोल के अनुमानों में उतार चढ़ाव देखने को मिलता रहा है। कभी नतीजे बिल्कुल सटीक, कभी अनुमान के आसपास तो कभी बिल्कुल ही विपरीत आते हैं। फिलहाल देशभर की नजर दिल्ली विधानसभा चुनाव के एग्जिट पोल्स पर टिकी हुई है, जिसमें आम आदमी पार्टी को प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में वापस आते हुए दिखाया जा रहा है।