Delhi Election 2020: भाजपा-कांग्रेस का घोषणापत्र
- फोटो : अमर उजाला
दिल्ली विधानसभा चुनाव में मतदान को कुछ ही दिन बाकी रह गए हैं। ऐसे में तमाम दल जोर-शोर से प्रचार में जुटे हैं और घोषणापत्र जारी कर रहे हैं। भाजपा के बाद रविवार दो फरवरी को कांग्रेस ने भी अपना घोषणापत्र जारी कर दिया। इसमें कांग्रेस ने रोजगार से लेकर बिजली-पानी में सब्सिडी जैसे मुद्दों पर वादों की झड़ी लगाई है। भाजपा ने भी अपने संकल्प पत्र में कई वादे गिनाए हैं। आइए जानते हैं कि किसने किस तरह के वादे गिनाए हैं।
भाजपा के संकल्प पत्र में ये वादे
- दिल्ली में 10 नए कॉलेज और 200 नए स्कूल।
- नौवीं कक्षा के छात्रों को साइकिल देने का वादा।
- कॉलेज जाने वाली छात्राओं को इलेक्ट्रिक स्कूटी।
- गरीब विधवा की बेटी की शादी के लिए 51 हजार रुपये उपहार।
- पांच वर्ष के कार्यकाल में कम से कम 10 लाख बेरोजगारों को रोजगार।
- दिल्ली को भ्रष्टाचार मुक्त पारदर्शी सरकार।
- गरीबों को दो रुपये किलो आटा।
- नई अधिकृत कॉलोनियों के विकास के लिए कॉलोनी डेवलपमेंट बोर्ड, विकास को प्राथमिकता।
- गरीबों की लड़की का अकाउंट 21 साल में 2 लाख रुपये।
- कूड़े का पहाड़ होगा खत्म।
- तीन से पांच साल में टैंकर मुक्त दिल्ली, नल से जल।
- मौजूदा सरकार में दी जा रही बिजली-पानी सब्सिडी जारी रहेगी।
कांग्रेस के घोषणापत्र में ये वादे
- 300 यूनिट तक मुफ्त होगी बिजली, 300-400 यूनिट तक बिजली इस्तेमाल करने पर 50% की छूट।
- 20 हजार लीटर तक पानी मुफ्त। इससे कम खर्च करने पर 30 पैसा/लीटर का कैशबैक मिलेगा।
- सरकारी नौकरियों में 33% महिला आरक्षण।
- ट्रांसजेंडरों के लिए शीला पेंशन योजना के तहत 5,000 रुपये प्रति महीना का प्रावधान।
- स्नातकों को हर महीने 5,000 रुपये और परा स्नातकों को 7,500 रुपये बेरोजगारी भत्ता की योजना।
- बीपीएल कोटे वाले परिवारों के एक सदस्य को स्टार्टअप के लिए 25 लाख रुपये की एकमुश्त राशि।
- कुल बजट का 25 प्रतिशत पलूशन कंट्रोल करने में खर्च।
- सरकार में आने के छह महीने बाद बेहतरीन लोकपाल बिल लाएंगे।
- AIIMS जैसे पांच नए सुपर स्पेशिलिटी हॉस्पिटल बनाए जाएंगे।
- नागरिकों को इमरजेंसी मेडिकल हेल्प व एम्बुलेंस की सुविधा।
- सभी अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करेंगे और इन कॉलोनियों के कल्याण और बुनियादी ढांचे को सुधारने के लिए पांच साल में 35,000 करोड़ खर्च करेंगे।
- नागरिकता कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। अगर सरकार बनी तो दिल्ली में न तो एनआरसी लागू होगा न एनपीआर का काम होगा।