आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल नई दिल्ली सीट से दस हजार से ज्यादा वोटों से आगे चल रहे हैं। केजरीवाल की जीत लगभग तय है। पिछली बार साल 2015 में केजरीवाल ने इस सीट पर 30 हजार के ज्यादा मतों से जीत हासिल की थी। पिछली बार भाजपा ने नुपूर शर्मा को यहां से मैदान में उतारा था। इस बार भाजपा ने केजरीवाल के सामने भाजपा के सुनील यादव और कांग्रेस के रोमेश सब्बरवार हैं।
नई दिल्ली विधानसभा सीट वो क्षेत्र है जिसने दिल्ली को पांच मुख्यमंत्री दिए हैं। इसी बात से इस सीट की अहमियत का अंदाजा भी लगाया जा सकता है। नई दिल्ली से भाजपा को पिछले पांच चुनावों से हार का सामना करना पड़ रहा है। आखिरी बार 1993 में कीर्ति आजाद ने भाजपा को यहां से जीत दिलाई थी। उसके बाद से भाजपा यहां लगातार हार रही है। 1998 में कीर्ति आजाद को यहां से हराकर कांग्रेस की शीला दीक्षित मुख्यमंत्री बनीं। वह 15 साल तक यहां से जीत कर मुख्यमंत्री रहीं। 2013 में केजरीवाल ने उन्हें हराकर पूरे देश को चौंकाया और दिल्ली की गद्दी संभाली। 2015 में भी अरविंद केजरीवाल ने नई दिल्ली से 30 हजार से अधिक मतों से जीत हासिल की।
बता दे कि नई दिल्ली विधानसभा सीट पर कुल मतदाताओं की संख्या 14,3,708 है, इनमें सबसे ज्यादा 14.95 फीसदी मतदाता अनुसूचित जाति के हैं। रुझानों से साफ है कि इस बार जनता ने एक बार फिर केजरीवाल पर भरोसा जताया है। आम आदमी पार्टी कार्यालय में जीत का जश्न शुरु हो गया है। जबकि भाजपा दबी जुबान से अपनी हार स्वीकार कर रही है।