दिल्ली विधानसभा चुनाव की तारीख का एलान
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दिल्ली विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारों के नामांकन ने नया रिकॉर्ड बनाया था। फिर भी बीते 27 साल में सबसे कम प्रत्याशी इस बार चुनाव के मैदान में हैं। जबकि मतदाताओं की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। प्रत्याशियों का ग्राफ तेजी से नीचे आ रहा है। नामांकन प्रक्रिया के अंतिम दो दिन में सैकड़ों पर्चे दाखिल होने के बाद पहली बार डेढ़ हजार से ज्यादा आवेदन निर्वाचन कार्यालय के पास आए थे। बीते 24 जनवरी को स्क्रूटनी और नाम वापसी के बाद निर्वाचन कार्यालय ने मौजूदा चुनाव में 672 उम्मीदवारों को मान्यता दी। 1993 के चुनाव से लेकर अब तक इस चुनाव में सबसे कम प्रत्याशी मैदान में हैं। वर्ष 2013 के बाद से ही प्रत्याशियों की संख्या में कमी देखने को मिल रही है।
दिल्ली में पहली बार विधानसभा चुनाव 1952 में हुआ था। इस चुनाव में 187 प्रत्याशी मैदान में थे। इसके बाद विधानसभा भंग रही और 1993 में दूसरी बार विधानसभा चुनाव हुआ। इस दौरान 1316 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे। इनमें 1257 पुरुष और 59 महिलाएं शामिल थीं। इस चुनाव में सर्वाधिक 1155 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हुई थी, जोकि अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है।
इस बार 1009 उम्मीदवारों ने 1528 नामांकन पत्र दाखिल किए थे। इनमें 821 पुरुष और 188 महिलाओं के पर्चे शामिल थे। 24 जनवरी को इनमें से 26 ने नामांकन पत्र वापस ले लिए।
79 महिला प्रत्याशी मैदान में
वर्ष 2008 के विधानसभा चुनाव के बाद 2013 और 2015 के चुनाव में महिला उम्मीदवारों की संख्या में बेहद कमी देखने को मिली थी, लेकिन मौजूदा चुनाव में एक बार फिर इनकी संख्या में वृद्धि हुई है। 2008 में 81, 2013 में 71 और 2015 में 66 महिलाओं ने चुनाव लड़ा था। जबकि इस बार 79 महिला उम्मीदवार मैदान में हैं।