जाट बहुल सीटों पर त्रिकोणीय संघर्ष
मुंडका, नांगलोई, मटियाला और पालम जैसे जाट बहुल इलाकों में तीनों पार्टियों ने जाट बिरादरी से उम्मीदवार उतारे हैं। यहां पारंपरिक रूप से जाट मतदाता चुनाव परिणाम को प्रभावित करते रहे हैं। इन सीटों पर मुकाबला बेहद करीब है, क्योंकि उम्मीदवार अपनी ही बिरादरी के वोट बैंक को साधने में जुटे हुए हैं। नांगलोई सीट पर सबसे रोचक मुकाबला देखने को मिल रहा है। इस सीट पर तीनों दलों के उम्मीदवार शौकीन गोत्र के हैं। यहां दिल्ली सरकार के मंत्री रघुविंद्र शौकीन को भाजपा के पूर्व विधायक मनोज शौकीन व कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव रोहित चौधरी से कड़ी टक्कर मिल रही है।
गुर्जर बिरादरी का प्रभाव
छतरपुर और तुगलकाबाद सीटें गुर्जर समुदाय का गढ़ मानी जाती हैं। इन दोनों सीटों पर आप, भाजपा और कांग्रेस ने गुर्जर बिरादरी के दिग्गज उम्मीदवारों को मैदान में उतारकर मुकाबले को रोमांचक बना दिया है। चुनावी प्रचार के दौरान गुर्जर समुदाय के मतदाताओं पर पकड़ बनाने के लिए सभी पार्टियों ने एड़ी-चोटी का जोर लगा रखा है। छतरपुर सीट पर भाजपा से वर्तमान विधायक करतार सिंह तंवर व आप से पूर्व विधायक ब्रह्मप्रकाश तंवर के बीच मुकाबला है।
वैश्य और यादव बिरादरी की सीटें
रोहिणी सीट पर वैश्य समुदाय के उम्मीदवारों की त्रिकोणीय टक्कर देखने को मिल रही है। व्यापारिक क्षेत्र के रूप में पहचाने जाने वाले इस इलाके में वैश्य बिरादरी के वोट निर्णायक साबित हो सकते हैं। यहां विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता अपनों से दो-दो हाथ कर रहे हैं। वहीं, बादली सीट यादव बहुल क्षेत्र है, जहां तीनों पार्टियों के यादव उम्मीदवारों के बीच कांटे की टक्कर है। यहां पर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष देवेंद्र यादव एक बार फिर चुनाव लड़ रहे हैं।
अनुसूचित जाति की सीटों पर मुकाबला
आरक्षित सीटों पर भी जातीय समीकरण गहराए हुए हैं। बवाना, पटेल नगर, अंबेडकर नगर, त्रिलोकपुरी और गोकलपुर जैसे क्षेत्रों में उम्मीदवारों की जाति को ध्यान में रखकर रणनीति बनाई गई है। इन सीटों में शामिल तीन सीटों पर एक ही बिरादरी के उम्मीदवार आमने-सामने हैं, वहीं दो सीटों पर दूसरी अन्य जाति के नेता एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं। पटेल नगर सीट पर पूर्व मंत्री राजकुमार आनंद चुनाव लड़ रहे हैं।