पार्टी अध्यक्ष पद छोड़ने के बावजूद दिल्ली चुनाव की जिम्मेदारी संभाल रहे अमित शाह ने इस मामले में व्यूह रचना की। सूत्र बताते हैं कि उन्होंने नीतीश से व्यक्तिगत स्तर पर बातचीत कर उन्हें साझा रैलियां संबोधित करने के लिए राजी किया। इसी प्रकार अकाली दल के वरिष्ठ नेता सुखबीर सिंह बादल से संपर्क साध कर अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात सुनिश्चित कराई।
नड्डा से मुलाकात के बाद बादल ने दिल्ली चुनाव में भाजपा को समर्थन देने का बयान दिया। पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि अकाली दल के समर्थन के बाद आधा दर्जन ऐसी सीटों पर भाजपा को लाभ मिलेगा जहां सिख मतदाताओं की संख्या प्रभावशाली है। इसके अलावा नीतीश के साथ साझा रैलियों से अप्रवासी बिहारियों, पूर्वांचलियों के बीच महत्वपूर्ण सियासी संदेश जाएगा।
शाह के इस दांव से भाजपा दिल्ली चुनाव में राष्ट्रवाद के साथ राजग में एकजुटता का संदेश देने में कामयाब रही है। इसके साथ ही पार्टी के सहयोगी दल में अहम जिम्मेदारी संभालने के बावजूद विपक्षी नेताओं के लिए चुनावी रणनीति बनाने वाले प्रशांत किशोर से भी निजात मिल गई है। गौरतलब है कि साझा रैली पर सहमति देने के तत्काल बाद नीतीश ने प्रशांत किशोर के साथ सीएए पर सवाल उठाने वाले पवन कुमार को जदयू से बाहर कर दिया है।