नजफगढ़ विधानसभा क्षेत्र में निर्दलीय उम्मीदवार तीन बार जीते हैं। वहीं, साल 2015 में पहली बार क्षेत्र के विधायक कैलाश गहलाते को मंत्री बनाया गया। यहां के लोगों ने बड़े नेताओं को हराकर निर्दलीय उम्मीदवार को मौका दिया। दो चुनावों में निर्दलीय उम्मीदवार दूसरे नंबर पर रहे। आप ने इस सीट पर दो बार जीत दर्ज की, जबकि भाजपा और कांग्रेस को एक-एक बार मौका मिला।
हालांकि, मौजूदा समय में यह सीट खाली है। हाल ही में कैलाश गहलोत ने आप छोड़ दी थी। 1993 में नजफगढ़ विधानसभा सीट अस्तित्व में आई। इस सीट पर सबसे पहले निर्दलीय उम्मीदवार को मौका मिला। इसके बाद कांग्रेस को जीत मिली। यहां मिली-जुली बसावट है। विधानसभा में सुरखपुर, झरोदा कलां, दिचाऊं कलां, मित्राऊं, कैर, मुंडेला खुर्द, बाकरगढ़, काजीपुर, ईसापुर, ढांसा, मलिक पुर, उजवा गांव, समसपुर खालसा, जफरपुर कलां, सुरेहरा, खैरा प्रमुख गांव हैं। वहीं गोपाल नगर, धर्मपुरा, रोशन पुरा, इंद्रा पार्क, थाना रोड, नया बाजार, नजफगढ़ बाजार सहित अन्य प्रमुख अनधिकृत कॉलोनियां हैं।
तीन वार्डों पर भाजपा का कब्जा
यहां निगम के चार वार्ड हैं जिनमें से तीन पर भाजपा का कब्जा है, जबकि एक वार्ड पर निर्दलीय पार्षद है जो मौजूदा समय में आप में शामिल हो गईं। नजफगढ़ वार्ड से अमित खरखड़ी, दिचाऊं कलां वार्ड से नीलम पहलवाल, रोशन पुरा से देवेंद्र डबास भाजपा से पार्षद हैं। वहीं, ईसा पुर वार्ड से निर्दलीय मीना यादव पार्षद हैं।
1993 से अब तक सीट का सियासी सफर
वर्ष जीते (पार्टी) हारे (पार्टी)
1993 सूरज प्रसाद पालीवाल (निर्दलीय) रन सिंह (भाजपा)
1998 कंवल सिंह यादव (कांग्रेस) जय किशन शर्मा (निर्दलीय)
2003 रणबीर सिंह खरब (निर्दलीय) कंवल सिंह यादव (कांग्रेस)
2008 भरत सिंह (निर्दलीय) कंवल सिंह यादव (कांग्रेस)
2013 अजीत सिंह खरखड़ी (भाजपा) भरत सिंह (आईएनएलडी)
2015 कैलाश गहलोत (आप) भरत सिंह (निर्दलीय)
2020 कैलाश गहलोत (आप) अजीत सिंह खरड़ी (भाजपा)
विधानसभा के गांवों में 80 फीसदी किसान हैं, लेकिन सुविधाएं नहीं मिलती। खाद के लिए दूसरे राज्यों में जाना पड़ता है। कृषि उपकरण हो या बीज सभी के लिए किसान परेशान रहते हैं।
- कुलदीप रोज
गावों के साथ-साथ कॉलोनियों की सड़कें व नालियां भी टूटी हुईं हैं। लोगों को आवागमन में परेशानी होती है। इन समस्याओं को कई बार प्रशासन के सामने रखा गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
- मांगे राम राजपूत
जिन गांवों में सीवर की सुविधा है, वहां कभी सफाई नहीं होती। अक्सर लोगों को गंदे पानी में से होकर गुजरना पड़ता है। इसके अलावा बुजुर्गों को समय पर पेंशन भी नहीं मिल
रही है।
-विजेंद्र राजपूत