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पार्टी से ज्यादा नेताओं के चेहरे पर चर्चा, कोई सड़कों पर तो कोई महिला सुरक्षा पर देना चाहता है वोट

Tue, 21 Jan 2020 02:40 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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दिल्ली का वोटर - फोटो : Amar Ujala
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शाम 3:30 बजे का वक्त। सिहरन पैदा करने वाली ठंडी हवाओं के बीच लोग चाय की दुकान पर खड़े हैं। हाथ में छन्नी लेकर दुकानदार चाय को उबालने में व्यस्त है तो वहां खड़े लोग आपस में कौन नेता अच्छा, कौन बुरा? इसकी चर्चाओं में मग्न हैं। बीच बीच में चाय वाला भी इनकी चर्चा में दिलचस्पी लेता है और फिर अपने काम में व्यस्त हो जाता। कोई सड़क-पानी के मुद्दे पर अपना वोट देना चाहता है तो कोई महिला सुरक्षा पर। शीशगंज गुरुद्वारे के ठीक सामने वर्षों पुरानी अनवर चाय वाले की दुकान पर ये जमा लगा था। 

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चाय पीते-पीते जसपाल सिंह कहते हैं, भई इस बार तो खिचड़ी हो गया है चुनाव। नेताओं ने दल बदल लिए हैं, अब किसको वोट करोगे? इस पर मनोज टंडन बोले, इस बार तो अलग ही राजनीति देखने को मिल रही है। जो पहले कांग्रेस में था वो अब अपना दल बदल कर आप में आ गया है और आप वाला कांग्रेस में। अनवर हंसते हुए बोले-ये राजनीति है, भई। मनोज ने कहा, राजनीति तो ठीक है, लेकिन जनता का क्या? हालत वहीं के वहीं हैं। इसी  बीच जसपाल सिंह (तपाक से बोले), काम तो किया ही है। फिर मनोज बोले, हां कितना किया है, दिख रहा है। इस बार वोट बहुत सोच समझकर देना है। सीवर लाइन, पीने का पानी, सड़कें और सबसे ज्यादा चांदनी चौक में जाम के हालत, आप तो सब जानते ही हैं जसपाल जी। 

जसपाल, हां बिलकुल। फिर अनवर बोले, भई बाजार की अपनी समस्याएं हैं और जनता की अपनी। इस बार ऐसा नेता हो, जो दूसरों को कोसने से पहले जनता का काम कर दे। बातचीत का ये सिलसिला यहीं नहीं थमता। चर्चा चल ही रही थी कि व्यापारी विवेक वहां आ पहुंचे और महिला सुरक्षा का मुद्दा उठाने लगे। उन्होंने कई काम गिनाते हुए कहा कि वोट काम पर ही पड़ना चाहिए। वहीं मनोज कहते हैं कि दिल्ली में अब वही होना चाहिए, जिसके पास केंद्र हो। पहले ऐसा ही था, सब ठीक चल रहा था। इसके बाद इनकी चर्चाओं ने मोड़ ले लिया और दूसरे मुद्दों पर निकल पड़ीं। 

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चांदनी चौक को सियासत का केंद्र माना जाता है

दरअसल चांदनी चौक विधानसभा दिल्ली का सबसे पुराना इलाका है। ये दिल्ली की सियासत का प्रमुख केंद्र माना जाता है। 1952 में पहली बार यहां से कांग्रेस के युद्धवीर सिंह ने जीत हासिल की। तब से लेकर अब तक एक-एक बार भाजपा और आप तो कांग्रेस के चार बार विधायक रह चुके हैं। प्रहलाद सिंह साहनी 1998 से 2015 तक 17 साल यहां से विधायक रहे थे। 

इस बार सबसे अलग है यहां का चुनाव 
चांदनी चौक सीट से इस बार चुनाव पूरी दिल्ली में सबसे अलग है। चार विधानसभा क्षेत्रों से जीतने वाले प्रहलाद सिंह साहनी कांग्रेस छोड़ आम आदमी पार्टी में आ चुके हैं। जबकि वर्तमान विधायक अलका लांबा आप को छोड़ कांग्रेस में आ चुकी हैं। दोनों ही नेताओं ने 2015 में पुरानी पार्टियों से चुनाव लड़ा था। इस बार फिर इनके बीच टक्कर है, लेकिन फर्क सबसे बड़ा यही है कि दोनों का दल बदल चुका है। भाजपा के सुमन कुमार गुप्ता पिछली बार भी मैदान में थे और इस बार भी हैं। 

इनमें सीधी टक्कर  
प्रत्याशी                  पार्टी
अलका लांबा            कांग्रेस
सुमन कुमार गुप्ता     भाजपा
प्रहलाद सिंह            आप

2015 का विधानसभा चुनाव 
पार्टी        प्रत्याशी                      वोट          फायदा/नुकसान
आप      अलका लांबा               36756         +27.39
भाजपा    सुमन कुमार गुप्ता       18469         -1.16
कांग्रेस    प्रहलाद सिंह              17,930        -13.70

चांदनी चौक सीट: मतदाता
लोकसभा क्षेत्र: चांदनी चौक

पुरुष           62,723
महिला         51,055
ट्रांसजेंडर       06
कुल मतदाता   1,13,784

जातिगत समीकरण
मुस्लिम 20 फीसदी
पंजाबी 17 फीसदी
वैश्य  15 फीसदी
एससी  17 फीसदी
ओबीसी  9 फीसदी
सामान्य व अन्य  07 फीसदी
ब्राह्मण  03 फीसदी
पूर्वांचली सहित अन्य- 12 फीसदी
(नोट : जातीय आंकड़ें-राजनीतिक पार्टियां, अन्य सभी आंकड़ें चुनाव कार्यालय के आधार पर)
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