दिल्ली में चुनाव प्रचार अपने अंतिम चरण में है। सभी पार्टियों के नेताओं का आक्रामक रुख और तीखी बयानबाजी जारी है। सोमवार को प्रेस वार्ता में केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने सीएम अरविंद केजरीवाल को निशाने पर लिया। जावड़ेकर ने कहा कि केजरीवाल मासूम चेहरा बना कर लोगों से पूछ रहे है कि क्या मैं आतंकवादी हूं? आप आतंकवादी हैं और इसके लिए बहुत सारे सबूत हैं। आपने स्वयं कहा था कि आप एक अराजकतावादी हैं, अराजकतावादी और आतंकवादी के बीच बहुत अंतर नहीं है।
इस मौके पर भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी और केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर भी उनके साथ मौजूद थे। इससे पहले सांसद प्रवेश वर्मा ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को आतंकवादी कहा था। इस पर पूरी आप आदमी पार्टी ने कड़ा विरोध जताया था।
आप का पलटवार
वहीं, आप सांसद संजय सिंह ने पलटवार करते हुए कहा- इस तरह का काम देश की राजधानी में हो रहा है, जहां केंद्र सरकार बैठती है, चुनाव आयोग की मौजूदगी है। किसी केंद्रीय मंत्री को इस तरह की भाषा के इस्तेमाल की इजाजत कैसे दी जा सकती है? अगर अरविंद केजरीवाल आतंकी हैं तो मैं भाजपा को उन्हें गिरफ्तार करने की चुनौती देता हूं।
अरविंद केजरीवाल ने भी प्रवेश वर्मा द्वारा आतंकी कहे जानें पर प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने सवालिया भरे लहजे में कहा कि उन्होंने दिल्ली के बुजुर्गों को तीर्थयात्रा कराई, इससे क्या वह आतंकवादी बन गए? जब बॉर्डर पर शहीद होता है तो उन्होंने उसके परिवार का ख्याल रखने का काम किया। क्या कोई आतंकवादी ऐसा करता है? केजरीवाल ने कहा कि उन्होंने देश के लिए अपनी जान की बाजी लगा दी है, लेकिन भाजपा के लोग आतंकवादी कह रहे हैं।
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को आतंकवादी कहे जाने के खिलाफ शुक्रवार को आम आदमी पार्टी (आप) कार्यकर्ताओं ने शांति मार्च भी निकाला था। कार्यकर्ताओं ने मुंह पर काली पट्टी बांधकर हाथ में बैनर ले रखे थे। इस दौरान लोगों से अपील की कि अरविंद केजरीवाल को आतंकवादी नहीं मानने वाले 8 फरवरी को झाडू़ के निशान वाला बटन दबाएं।
आप का कहना है कि अपनी हार को देखकर भाजपा बौखला गई है, इसलिए वह निचले दर्जे की बयानबाजी कर रही है। इसी कड़ी में भाजपा सांसद प्रवेश वर्मा ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को आतंकवादी तक कह डाला। यह दिल्ली की जनता का अपमान है। इसके विरोध में दिल्ली के सभी 70 विधानसभा क्षेत्रों में आप नेताओं व कार्यकर्ताओं ने शांतिपूर्ण मार्च निकाला।
तीन दिवसीय इस अभियान में दिल्ली के लोगों से सवाल किया जा रहा है कि भारी बहुमत से चुनी गई सरकार व उसके मुख्यमंत्री को आतंकी कहना क्या दिल्ली का अपमान नहीं है।