दिल्ली विधानसभा स्थित अपने कक्ष में भाजपा विधायक प्रवेश वर्मा
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दिल्ली विधानसभा परिसर स्थित कक्ष नंबर-74 में सोमवार को 32 साल पहले की यादें ताजा हो गई। वर्ष 1993 में यह कक्ष दिल्ली सरकार के मंत्री प्रवेश वर्मा के पिता साहिब सिंह को मंत्री बनने पर आवंटित हुआ था।
साहिब सिंह ने इस कक्ष में कई अहम फैसले लिए थे और दिल्ली व देश की राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाई। उस समय प्रवेश वर्मा कभी-कभी अपने पिता के साथ इस कक्ष में आते थे। अब वही कक्ष उन्हें मिला है।
सोमवार को जब प्रवेश वर्मा ने विधानसभा परिसर में कदम रखा तो वह इसी कक्ष में बैठे। यह न सिर्फ उनके लिए व्यक्तिगत तौर पर एक भावनात्मक पल था।
विधानसभा में भी प्रवेश वर्मा को वही सीट नंबर-दो आवंटित की गई है, जो 1993 में उनके पिता साहिब सिंह को दी गई थी।
यह एक दिलचस्प तात्कालिक घटनाक्रम है, जो राजनीति में पीढ़ी दर पीढ़ी बदलाव की कहानी सुनाता है। इसके अलावा यह घटनाक्रम व्यक्तिगत स्मृतियों को ताजा करता है।
यह पल प्रवेश वर्मा के लिए निश्चित रूप से गौरवपूर्ण रहा है, क्योंकि यह उनके पिता की राजनीतिक यात्रा की निरंतरता है। उनके लिए यह एक बड़ी जिम्मेदारी भी है, क्योंकि अब वह उस स्थान पर हैं, जहां एक समय उनके पिता ने अपनी शक्ति और राजनीतिक कौशल का परिचय दिया था।
5 अन्य विधायक भी पिता की विरासत आगे बढ़ाने पहुंचे
विधानसभा में प्रवेश वर्मा के अलावा पांच अन्य विधायक भी अपने-अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाने पहुंचे है। इन विधायकों के पिता अलग-अलग समय के दौरान विधायक रहे है। वर्ष 1993 में नरेला से विधायक बने इंदराज सिंह के बेटे रविंद्र इंदराज बवाना से विधायक बने है और उनको दिल्ली सरकार में भी मंत्री बनाया है।
वहीं कांग्रेस व आम आदमी पार्टी से चार बार विधायक रहे प्रह्लाद सिंह साहनी के बेटे पुर्नदीप साहनी चांदनी चौक से विधायक चुने गए हैं। वहीं विभिन्न पार्टियों से छह बार विधायक बने शोएब इकबाल के बेटे आले मोहम्मद इकबाल मटिया महल से विधायक निर्वाचित हुए है। भाजपा के दिग्गज नेता व पूर्व मुख्यमंत्री मदनलाल खुराना के बेटे हरीश खुराना मोतीनगर से विधायक बने।