पटियाला हाउस कोर्ट ने शुक्रवार को आरोपी चैतन्यानंद सरस्वती की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। आरोपी ने अपने खिलाफ कथित धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश के मामले में बीएनएस धारा 482 (गिरफ्तारी से पहले जमानत की मांग) के तहत एक आवेदन दायर किया था। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हरदीप कौर ने दलीलें सुनने के बाद अपने फैसले को सुरक्षित रख लिया और कहा कि आदेश शुक्रवार शाम या शनिवार को सुनाया जाएगा। हालांकि, अदालत ने अपना फैसला शुक्रवार को ही सुना दिया। बाबा पर 17 छात्राओं से यौन उत्पीड़न का भी कथित आरोप है।
न्यायाधीश ने फैसला सुनाते हुए कहा कि जांच के प्रारंभिक चरण में पुलिस को धोखाधड़ी, ठगी, षड्यंत्र और धन के दुरुपयोग की पूरी श्रृंखला स्थापित करने के लिए आरोपी से हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता है। शिकायतकर्ता पीए मुरली का आरोप है कि आरोपी और अन्य लोग साजिश, जालसाजी, प्रतिरूपण, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और पीठम (श्री श्री जगद्गुरु शंकराचार्य महासंस्थानम दक्षिणाम्नाय श्री शारदा पीठम, श्रृंगेरी) से संबंधित संपत्तियों और धन के दुरुपयोग में शामिल थे।
यह भी आरोप लगाया कि वीआर गौरीशंकर 26 अक्तूबर, 1989 तक पीठम के तत्कालीन सीईओ और प्रशासक थे, लेकिन उनके पद को रद्द कर दिया गया। उसके बाद शिकायतकर्ता को सात मार्च, 2024 को कर्नाटक के चिकमगलूर जिला के पीठम का प्रतिनिधित्व करने के लिए अधिकृत किया गया। उनका आरोप है कि पीठम विभिन्न धर्मार्थ, शैक्षिक और सामाजिक पहलों में भी शामिल है और इसी प्रक्रिया में, श्री शारदा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन मैनेजमेंट-रिसर्च पीठम के तत्वावधान में शैक्षिक और सामाजिक संस्थानों में से एक है, जो दिल्ली के वसंत कुंज में स्थित है।
जाली दस्तावेज, पासपोर्ट और अलग नामों से खाता होने का आरोप
शिकायकर्ता ने आरोप लगाया कि आरोपी ने एआईसीटीई के रिकॉर्ड में हेराफेरी की और वह यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में दो अलग-अलग नामों से खाता भी संचालित कर रहा है। इन खातों को खोलने और खाते को दूसरी शाखा में स्थानांतरित करते समय, अलग-अलग विवरणों वाले अलग-अलग दस्तावेज दिए गए थे। यह भी आरोप है कि उसने एफआईआर दर्ज होने के बाद ट्रस्ट के नाम पर यस बैंक के खाते से लगभग 50 से 55 लाख रुपये निकाले हैं। अभियोजन पक्ष ने आरोपी पर जाली दस्तावेज बनाने, अलग-अलग नामों से दो पासपोर्ट बनवाने और अलग-अलग नामों से बैंक खाते संचालित करने का आरोप भी लगाया है।