दिल्ली में करप्शन खत्म करने की जिम्मा उठाए भ्रष्टाचार निरोधक शाखा खुद कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है। आज भी उसके यहां 35 फीसदी से ज्यादा पद खाली पड़े है।
दिल्ली में केजरीवाल के मुख्यमंत्री काल के दौरान इसे भरने की कोशिश तो हुई लेकिन उसपर ऊंट के मुंह में जीरा के सामान कार्रवाई हुई। 49 दिन बाद उनकी सरकार जाते ही खाली सीटों के भरने की योजना भी ठंडे बस्ते में है।
सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी के मुताबिक भ्रष्टाचार निरोधक शाखा में ज्वाइंट कमिश्नर और डीसीपी को छोड़ दे तो कुल 114 पद है, फिलहाल में इसमें 39 पद खाली पड़े है। इसमें जांच अधिकारियों इंसपेक्टर रैंक के कई पद भी शामिल है।
बताते चलें कि एक साल पहले डीसीपी ज्वाइंट कमिश्नर समेत कुल 117 पद थे जिसमें 50 पद खाली पड़ा था। लेकिन दिसंबर में जब दिल्ली की सत्ता पर आम आदमी पार्टी की सरकार बनी। अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री तो उन्होंने भ्रष्टाचार निरोधक शाखा को आगे बढ़ाने का काम शुरू किया।
तत्कालिकसरकार की पहली कोशिश खाली पड़े पदों को भरना था। उस 49 दिनों की सरकार के दौरान 50 पदों को भरने की योजना पर काम किया लेकिन 11 पद ही अभी तक भर पाएं। सरकार जाते ही इसे भरने की रफ्तार भी थम गई। अभी भी भ्रष्टाचार निरोधक शाखा के 39 कर्मचारियों व अधिकारियों के पद खाली पड़े हैं।