डॉ. विक्रम अग्रवाल ने बताया कि 49 वर्षीय मरीज को बचाने के लिए दिल की जरूरत थी। उसे नोटो के नियम के तहत दिल आवंटित हुआ। मरीज इस्केमिक कार्डियोमायोपैथी से पीड़ित था। इसमें हृदय की पंपिंग क्षमता क्षतिग्रस्त हृदय की मांसपेशियों के कारण कम हो गई थी। मरीज ने अगस्त 2024 में हृदय प्रत्यारोपण के लिए राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन में पंजीकरण करवाया।
लंबी प्रतीक्षा के बाद उसे 35 वर्षीय महिला के अंगदान से दिल मिला। महिला ने इलाज के दौरान गाजियाबाद में दम तोड़ दिया था। उन्होंने कहा कि समय पर दिल पहुंचने के बाद मरीज का प्रत्यारोपण किया गया। देश में अंगदान की कमी के कारण मरीजों को समय पर प्रत्यारोपण के लिए अंग नहीं मिल पाता। ऐसे में उन्हें लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है।