राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण पैदा कर रहे विभागों व निकायों की अब खैर नही है। लाख चेतावनी के बावजूद प्रदूषण पर अंकुश नहीं लगाने वाले विभागों व निकायों पर नजर रखने के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीबीसीबी) ने विभाग के अधिकारियों की फौज उतारी है। पर्यावरण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन के निर्देश पर इसके लिए 41 टीमों का गठन
किया गया है। अब यह टीमें कार्रवाई में कोताही बरतने वाले विभाग या किसी निकाय पर आपराधिक मामला भी दर्ज कराएगी।
राजधानी में निर्माण कार्य धड़ल्ले से चल रहे हैं। कबाड़ा वाहन प्रदूषण उगल रहे हैं। धधक रही लैंडफिल साइट प्रदूषण बढ़ाने में कोई कसर नही छोड़ रही है। दरअसल, शिकायत मिलने पर सीपीसीबी एप समीर के जरिए विभागों को प्रदूषण पर लगाम लगाने के निर्देश देती है। लेकिन पिछेले कुछ दिनों से कई बार एप पर निर्देश देने के बावजूद संबंधित विभाग कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। अब मंत्री से मिले निर्देश के बाद बोर्ड खुद इन मामलों में कार्रवाई करेगा। प्रदूषण संबंधी गतिविधियों पर निगरानी रखने के लिए बोर्ड की 41 टीमें गठित की गई हैं। ये टीमें लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं। टीम तत्काल उसे ऐप पर फोटोग्राफ के साथ अपलोड भी कर रही हैं। सीपीसीबी के अधिकारी के मुताबिक प्रदूषण संबंधी शिकायतों की अनेदखी करने वाले विभाग या निकायों के खिलाफ अब सख्त कार्रवाई की जाएगी।
लैंडफिल साइट की आग पर तत्काल काबू पाए निगम
भलस्वा में लगी आग की घटना और इससे बढ़ रहे प्रदूषण पर सख्त रवैया अख्तियार करते हुए सीपीसीबी ने निगम को तत्काल इसे नियंत्रित करने का निर्देश दिया है। बवाना सहित आसपास के क्षेत्र में भी चल रहे निर्माण कार्यों के मालिकों को नियम पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि सीपीसीबी का मानना है कि कुछ मेट्रो साइट्स पर भी नियमों की अनदेखी हो रही है।
मास्क की भी बढ़ने लगी है बिक्री
बढ़ते प्रदूषण से लोगों की तकलीफें भी बढ़ने लगी हैं। इसे देखते हुए लोगों ने सुबह के वक्त सैर पर निकलना कम कर दिया है। इन हालातों से बचने के लिए मास्क की भी बिक्री
बढ़ने लगी है।
आज विश्व स्ट्रोक दिवस है। राजधानी के डॉक्टरों ने स्ट्रोक दिवस की पूर्वसंध्या पर शहर में फैल रही बीमारी और प्रदूषण का लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि दिल्ली वालों को प्रदूषण के चलते न सिर्फ सांस लेने बल्कि मस्तिष्क आघात का भी खतरा हो सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि जिस तरह खराब हवा और दमा, सीओपीडी जैसी बीमारियों का दायरा बढ़ रहा है। ऐसी स्थित में प्रदूषित वायु में सांस लेने से मस्तिष्क आघात हो सकता है। आघात चिकित्सा की वह स्थिति है जिसमें शरीर में रक्त आपूर्ति कम होने से मस्तिष्क की कोशिकाएं मर जाती हैं।
आघात की वजह मस्तिष्क को रक्त की आपूर्ति करने वाली नसों में अवरोध या टूटफूट है। महाराजा अग्रसेन अस्पताल के वरिष्ठ न्यूरो सर्जन डॉ. विकास गुप्ता ने बताया कि मस्तिष्क आघात होने पर पूरी तरह से रिकवरी की बहुत कम संभावना रहती है। शुरुआत में ही हस्तक्षेप करने से अक्सर पूरी तरह से रिकवरी देखने को मिलती है। इसलिए शुरुआती लक्षण पहचानना बहुत महत्वपूर्ण है जिसमें बेतरतीब मुस्कुराहट, बांह सुन्न पड़ जाना या कमजोरी और बोलने में लड़खड़ाहट शामिल है। वेंक्टेश्वर अस्पताल के डॉ. पुष्पिंदर कुमार सचदेवा ने बताया कि लगभग 20 फीसदी लोगों में 30 से 40 वर्ष की आयु के बीच स्ट्रोक होने की शिकायतें देखने को मिल रही हैं।
नोएडा शहर में स्मॉग का कहर, प्रदूषण रेड जोन में
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक, शहर में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। हवा की गुणवत्ता में गिरावट आई है। रविवार को धुएं के घने बादल के साथ पीएम-2.5 व पीएम 10 का स्तर बढ़ गया। दोनों ही रेड जोन में हैं। उधर, प्राधिकरण प्रदूषण पर काबू पाने के लिए कदम उठा रहा है।
जिला मजिस्ट्रेट बीएन सिंह ने बताया गंभीर श्रेणी के प्रदूषण से निपटने के लिए जीआरएपी के तहत सुझाए गए सभी उपाय किए जा रहे हैं। जिला प्रशासन और यूपीपीसीबी ने सड़कों की खराब स्थितियों के लिए संबंधित अधिकारियों को लिखा है। यूपीपीसीबी और प्राधिकरण की टीम निर्माण स्थलों का दौरा कर देख रही है कि निर्माण सामग्री खुले में न रखी हो। सभी को एनजीटी निर्देशों का पालन करने के लिए कहा जा रहा है। यूपीपीसीबी अभी स्कूलों और कुछ औद्योगिक स्थलों को बंद करने के बारे में नहीं सोच रही है। 1 से 10 नवंबर तक सभी कंस्ट्रक्शन साइटों का काम बंद होगा। इसके लिए प्राधिकरण की टीम गठित की जाएगी।