दिल्ली-एनसीआर की जहरीली हवा सिर्फ सांस की बीमारियां ही नहीं, बल्कि दिमाग पर भी हमला कर रही है। यह खुलासा कई डॉक्टरों की रिपोर्ट्स और वैज्ञानिक अध्ययनों से हुआ है, जो बताते हैं कि पीएम 2.5 जैसे महीन कण फेफड़ों से होते हुए खून और दिमाग तक पहुंचकर सूजन पैदा करते हैं। इससे माइग्रेन के अटैक बढ़ रहे हैं। सर्दियों में वायु प्रदूषण बढ़ने के साथ ही अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या में 15 से 20 फीसदी तक का इजाफा हुआ है। ऐसे में प्रदूषण की वजह से माइग्रेन, सिरदर्द, चक्कर और तनाव जैसे न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की रिपोर्ट के अनुसार, पीएम 2.5 का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की सुरक्षित सीमा से 11.6 गुना ज्यादा है, जो 168 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक पहुंच गई है। डॉक्टरों ने बताया जहरीली हवा में सांस लेने से नसों में सूजन पैदा हो रही है, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ाता है और न्यूरोट्रांसमीटर के संतुलन को बिगाड़ता है, जिससे माइग्रेन जैसे दर्द भड़क उठते हैं।
कैसे पहुंचता है प्रदूषण दिमाग तक?
डॉक्टरों के अनुसार, पीएम2.5 इतने छोटे कण होते हैं कि सांस के जरिये फेफड़ों में घुसकर खून में मिल जाते हैं। वहां से ये ब्लड-ब्रेन बैरियर को पार करके दिमाग तक पहुंचते हैं। नाक के रास्ते से भी ये सीधा दिमाग में घुस सकते हैं जिससे दिमाग में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन पैदा होती है। ट्राईजेमिनल नर्व सिस्टम एक्टिवेट हो जाता है, जो माइग्रेन का मुख्य ट्रिगर है। ऐसे में, माइग्रेन के अटैक ज्यादा बार, ज्यादा तेज और ज्यादा लंबे हो जाते हैं। वैज्ञानिक अध्ययनों में भी यह बात साबित हो चुकी है। दुनिया भर की रिसर्च पबमेड और साइंस डायरेक्ट पर प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, पीएम 2.5, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (एनओ2) और ओजोन जैसे प्रदूषक माइग्रेन के जोखिम को बढ़ाते हैं। ऐसे में एक सिस्टमैटिक रिव्यू के अनुसार, इन प्रदूषकों से माइग्रेन अटैक का खतरा 10-20 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।
मुख्य लक्षण
- माइग्रेन क लक्षण चार चरणों में दिख सकते हैं, लेकिन हर व्यक्ति में सभी चरण नहीं होते
- प्रोड्रोम चरण (अटैक से 1-2 दिन पहले): मूड में बदलाव, थकान, बार-बार जम्हाई आना, भूख बढ़ना या कम होना
- ऑरा चरण (कुछ लोगों में अटैक से पहले): आंखों के सामने चमकती रोशनी, टेढ़ी-मेढ़ी लाइनें, धुंधला दिखना, सुन्नपन या झुनझुनी महसूस होना, बोलने में दिक्कत
- अटैक का चरण (मुख्य दर्द): सिर में तेज धड़कन वाला दर्द (आमतौर पर एक तरफ), उल्टी, रोशनी, आवाज या गंध से परेशानी, चक्कर आना, थकावट
- पोस्ट ड्रोम चरण (दर्द के बाद): कमजोरी, भ्रम महसूस होना, जैसे हैंगओवर
- अगर ये लक्षण बार-बार हों, तो न्यूरोलॉजिस्ट से जांच करवाएं
बचाव के उपाय
- माइग्रेन का पूरा इलाज नहीं है, लेकिन ट्रिगर्स से बचकर और लाइफस्टाइल बदलकर इसे कंट्रोल किया जा सकता है। खासकर प्रदूषण से जुड़े मामलों में:
- डायरी रखें कि किन चीजों (तनाव, नींद की कमी, कुछ खाना जैसे चॉकलेट/चीज, तेज गंध, मौसम बदलाव) से दर्द शुरू होता है।
- रोज एक ही समय पर सोना-उठना, 7-8 घंटे नींद, समय पर खाना।
- पानी ज्यादा पीएं, एंटीऑक्सीडेंट वाली चीजें जैसे फल-सब्जियां, नट्स खाएं। कैफीन, अल्कोहल से दूर रहें।
- रोज 30 मिनट वॉक या योग करें। ध्यान, गहरी सांसें या मेडिटेशन से तनाव कम करें।
प्रदूषण से विशेष बचाव
- बाहर एन95 व ए99 मास्क पहनें
- घर में हेपा फिल्टर वाला एयर प्यूरीफायर इस्तेमाल करें, खिड़कियां बंद रखें
- एक्यूआई ज्यादा होने पर घर से कम निकलें
- पौधे लगाएं जो हवा साफ करें