कोविड-19 से मरने वाले व्यक्ति के शरीर में वायरस कब तक जिंदा रहता है, इसका पता लगाने के लिए दिल्ली एम्स जल्द ही देश का पहला कोविड पोस्टमार्टम करने की तैयारी कर चुका है। एम्स के फॉरेंसिक विभाग के डॉक्टरों ने इसे लेकर पूरी योजना बना ली है। पोस्टमार्टम अगले सप्ताह में किया जा सकता है। विभागाध्यक्ष डॉ. सुधीर गुप्ता का कहना है कि पोस्टमार्टम के जरिए शव में वायरस के जीवित रहने की अवधि के अलावा इसके प्रसार और अंगों पर वायरस के प्रभाव का पता लगाया जाएगा।
दुनिया में अभी तक चीन और थाईलैंड जैसे देशों में ही कोरोना से जान गंवाने वालों के शवों का पोस्टमार्टम हुआ है। थाईलैंड में तो पोस्टमार्टम के दौरान संक्रमण की चपेट में आने से एक फॉरेंसिक विशेषज्ञ की मौत भी हो गई थी। डॉ. गुप्ता का कहना है कि पोस्टमार्टम को लेकर एम्स पहले ही अपने दिशा निर्देश तैयार कर चुका है। पूरी सावधानी बरतते हुए यह पोस्टमार्टम किया जाएगा। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार कोरोना से मरने वालों के शव प्रबंधन के दिशा निर्देश दिए जा चुके हैं। उन्हीं के अनुसार अंतिम संस्कार किया जा रहा है।
इन दिशा निर्देशों के अनुसार कोरोना से मरने वाले का पोस्टमार्टम नहीं करना है, जब तक कि कोई बहुत जरूरी स्थिति न हो। साथ ही पोस्टमार्टम करते वक्त फॉरेंसिक विशेषज्ञों को क्या-क्या एहतियात बरतनी है, इसके बारे में भी विस्तृत जानकारी दी जा चुकी है। डॉ. सुधीर गुप्ता ने बताया कि मृतक के कानूनी वारिस से सहमति लेने के बाद पोस्टमार्टम के जरिए किए जाने वाले इस अध्ययन में रोग विज्ञान और अणुजीव विज्ञान जैसे कई और विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि अभी तक चिकित्सीय अध्ययनों में पता चला है कि किसी शव में वायरस धीरे-धीरे खत्म होता है लेकिन अभी शव को संक्रमण मुक्त घोषित करने के लिए कोई निश्चित समय सीमा नहीं है।