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आ गया Delhi AIIMS का बयान: बताया HMPV वायरस कितना खतरनाक, इस रोग का नहीं कोई टीका; बचने के बताए ये पांच उपाय

Mon, 06 Jan 2025 07:41 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

HMPV: जीटीबी अस्पताल श्वसन चिकित्सा विभाग की डॉक्टर अंकिता गुप्ता ने कहा कि फिलहाल इस रोग का टीका नहीं है। ऐसे रोगों में बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक दवा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
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HMPV वायरस - फोटो : freepik
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विस्तार
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कर्नाटक और गुजरात में मिले मानव मेटान्यूमोवायरस (एचएमपीवी) के मरीज के बाद लोगों में बढ़ी घबराहट को एम्स ने बेवजह बताया है। एम्स का कहना है कि यह वायरस देश में सालों से है। इसके कारण कोरोना वायरस जैसी हालत होने की आशंका बहुत कम है।

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दो से तीन दिन में खुद ठीक हो जाते हैं मरीज
एम्स के मेडिसिन विभाग में डॉ. नीरज निश्चल ने बताया कि एम्स में इस रोग से पीड़ित मामले सामने नहीं आए। देश के दूसरे हिस्से में भी गंभीर पीड़ित की जानकारी नहीं मिली। फिलहाल इस वायरल को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है, हालांकि सतर्क रहना होगा। कोरोना महामारी की तरह सख्ती से कोविड नियम का पालन करना होगा। यदि किसी में लक्षण दिखाई देते हैं तो उन्हें तुरंत इलाज करवाना चाहिए। ज्यादातर मरीजों दो से तीन दिन में अपने आप ही ठीक हो जाते हैं।

रोग का नहीं है टीका
जीटीबी अस्पताल श्वसन चिकित्सा विभाग की डॉक्टर अंकिता गुप्ता ने कहा कि फिलहाल इस रोग का टीका नहीं है। ऐसे रोगों में बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक दवा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
 

स्वास्थ्य विभाग ने जारी की सलाह
स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय ने एचएमपीवी से बचाव के लिए सलाह जारी की है। दिल्ली के सभी सीडीएमओ, अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक, चिकित्सा निदेशक सतर्क रहने को कहा है। साथ ही आईएचआईपी-पोर्टल पर सभी आईएलआई और एसएआरआई मामलों की समय पर रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने। आईएचआईपी-पोर्टल पर एसएआरआई के सभी मामलों और इन्फ्लूएंजा के प्रयोगशाला की पुष्टि किए गए मामलों की उचित लाइन लिस्टिंग करने, रोगी की सुरक्षा के लिए उपाय को कहा है। यदि कोई संदिग्ध मामला मिलता है तो उसे तुरंत आइसोलेट करने की सलाह दी गई है। साथ ही उचित समय पर मरीज को इलाज देने को कहा है। ताकि बीमारी के प्रसार को उचित समय पर रोका जा सकें। उचित रिपोर्टिंग और उपचार सुनिश्चित करने के लिए एमएसएनएच के साथ अपने जिले के निजी अस्पतालों के साथ संपर्क करना भी शामिल हैं।

अस्पतालों के लिए सलाह
- हल्के मामलों में लक्षणों को कम करने के लिए उचित दवाएं उपलब्ध रखें
- ऑक्सीजन और अन्य सहायक उपभोग्य सामग्रियों की उपलब्धता
- स्वच्छता-रोगी सुरक्षा उपाय
- गंभीर तीव्र श्वसन संक्रमण (एसएआरआई) के गंभीर मामलों के उपचार के लिए सुविधाओं की पहचान
- वेंटिलेटर सहायता और चिकित्सा-पैरामेडिकल कर्मचारियों के बीच जागरूकता

जारी हुआ हेल्पलाइन
डीजीएचएस, मुख्यालय की हेल्पलाइन संख्या - 011-22307145 या 011-22300012
 

इन्हें हो सकता है रोग
- सभी उम्र के लोगों को हो सकता है ऊपरी और निचले श्वसन रोग
- छोटे बच्चों, वृद्धों और कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों में जोखिम अधिक
 

लक्षण
- खांसी
- बुखार
- नाक बंद होना
- सांस लेने में तकलीफ

गंभीर मामलों में लक्षण
- ब्रोंकाइटिस
- निमोनिया
 
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इससे बचे
- खांसने या छींकने से निकलने वाली बूंदें
- नजदीकी व्यक्तिगत संपर्क, जैसे कि हाथ छूना या हाथ मिलाना
- दूषित सतहों को छूना और फिर मुंह, नाक या आंखों को छूना

यह करें
- साबुन और पानी से बार-बार हाथ धोना
- बिना धुले हाथों से आंख, नाक या मुंह को छूने से बचना
- बीमार लोगों के साथ निकट संपर्क से बचना
- खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को ढकना
- बार-बार छुई जाने वाली सतहों को साफ करना
- बीमार होने पर घर पर रहना
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