राजधानी दिल्ली में इन दिनों आबोहवा जहरीली है। प्रदूषित हवा से स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। ऐसे में जहरीली हवा से बच्चों को बचाने के लिए एयरलेंस नाम का डिवाइस तैयार किया गया है।
मंगलवार को एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने डिवाइस को लांच करते हुए इसे स्कूली बच्चों के लिए एक तरह का संकटमोचक बताया। नाक के दोनों छिद्रों में बड़ी ही आसानी के साथ चिपकने वाला यह डिवाइस प्रदूषण के कणों को सांस के साथ नाक में प्रवेश करने से रोकता है।
साथ ही यह उपयोगकर्ता को प्रदूषण के स्तर के बारे में भी बताता है। डॉक्टरों के मुताबिक, यह डिवाइस 6 से 14 साल तक की आयु के बच्चों के लिए है, लेकिन जल्द ही इस डिवाइस को 17 वर्ष तक की आयु वाले बच्चों के लिए तैयार किया जाएगा।
एम्स निदेशक डॉ. गुलेरिया ने कहा कि हर साल वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ता जा रहा है। डेंगू और स्वाइन फ्लू जहां सुर्खियों में रहते हैं, वहीं वायु प्रदूषण को बहुत ही सामान्य रूप से लेते हैं, जबकि इसकी वजह से इंसान का शरीर सीधे तौर पर प्रभावित होता है। डॉ. गुलेरिया ने कहा कि लोगों को प्रदूषण को लेकर जागरूक करना बेहद जरूरी है।
एक साल में हुआ तैयार
एयरलेंस रोकेगा प्रदूषण
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डॉ. शशि रंजन ने बताया कि करीब एक साल पहले वे वायु प्रदूषण को लेकर प्रोजेक्ट पर काम करना चाहते थे। उस वक्त डॉ. गुलेरिया से भी संपर्क किया। तमाम अटकलों और चुनौतियों के बीच करीब एक वर्ष के बाद उन्होंने यह डिवाइस तैयार किया है।
उनकी टीम में आईआईटी और एम्स के विशेषज्ञ शामिल हैं। डॉ. शशि ने बताया कि बजट के अलावा इस डिवाइस की टेस्टिंग और इसके निर्माण के लिए उचित वातावरण तैयार करना उनके लिए बड़ी चुनौती रहा है।
उन्होंने बताया कि यह डिवाइस 500 रुपये में महीने भर के लिए है, हर दिन 12 घंटे तक एक डिवाइस लगाना होता है। हालांकि जिन्हें नाक या त्वचा की एलर्जी है, उन बच्चों के लिए यह ठीक नहीं है।
मास्क देखकर घबराते हैं लोग
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डॉक्टरों ने बताया कि वायु प्रदूषण जब भी बढ़ता है तो दिल्ली में मास्क वालों की संख्या तेजी से बढ़ने लगती है। जब भी हम सड़क या बाजार में मास्क वाला व्यक्ति देखते हैं, तो लोग दूरी बनाना शुरू कर देते हैं। एक स्टडी में भी पिछले दिनों इस तरह की मानसिकता सामने आई है। यहीं से एयरलेंस को बनाने का विचार आया।
एक सवाल के जवाब में डिवाइस निर्माता विशेषज्ञों ने कहा कि जल्द ही इसकी उपलब्धता को लेकर एम्स प्रबंधन के अलावा देश के सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों से चर्चा होने वाली है। चूंकि अभी यह प्रारंभिक चरण पर है, इसलिए जल्द ही इसके प्रयास तेज किए जाएंगे।