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ईको फ्रेंडली होगा दिल्ली-आगरा नेशनल हाईवे

Sat, 06 Aug 2016 10:37 AM IST
ऐहतेशाम उद्दीन अहमद/अमर उजाला, फरीदाबाद
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नेशनल हाईवे
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नेशनल हाईवे-2 सिक्स लेन प्रोजेक्ट वाहनों को तेज गति देने के साथ ही पर्यावरण संरक्षण भी करेगा। यह प्रोजेक्ट वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) के जरिए भूमिगत जलस्तर को रिचार्ज करेगा। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने शहर में 15 रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाए हैं।
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अरावली पहाड़ी क्षेत्र में बसी औद्योगिक नगरी में लगातार जल दोहन की वजह से भू जलस्तर तेजी से गिर रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक यहां भूमिगत जलस्तर प्रतिवर्ष 10 फुट की दर से नीचे उतर रहा है। एनएचएआई प्रोजेक्ट डायरेक्टर मोहम्मद सफी के मुताबिक सिक्सलेन प्रोजेक्ट की योजना बनाते समय पर्यावरण और जल संरक्षण को भी शामिल किया गया। इसके तहत शहर से गुजरने वाले हाईवे पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाने का निर्णय लिया गया।

उन्होंने बताया कि नेशनल हाईवे-2 औद्योगिक शहर में 12 किलोमीटर (किमी 20.500 से किमी 32.500 तक) लंबा है। इस टुकड़े में 15 रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाए गए हैं। वर्षा का जल इन बोर तक पहुंचे इसके लिए दो लेन के बीच पूरी लंबाई में रेन वाटर ड्रेन लाइन बनाई गई है। 600-800 मिलीमीटर व्यास के पाइप के जरिए यह पानी बोर से होते हुए जमीन में जाएगा।
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25 लाख में तैयार हुए बोर
निर्माण कर्ता कंपनी के अधिकारी सचिंदर सिंह ने बताया कि रेन वाटर हार्वेस्टिंग के 15 बोर (कुएं) बनाने में करीब 25 लाख रुपये का खर्च आया। एक बोर और पाइप की लागत डेढ़ से दो लाख रुपये के बीच आई।

जलभराव से मिलेगी मुक्ति
एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर मो. सफी कहते हैं कि सिक्सलेन बनने के बाद हाईवे पर कहीं भी जलभराव की समस्या नहीं आएगी। शहर से गुजरने वाली सर्विस लेन भी हार्वेस्टिंग सिस्टम से जोड़ी जाएंगी।

बल्लभगढ़ में अतिक्रमण की चिंता
बल्लभगढ़ में सड़क और जलनिकासी प्रणाली पर दुकानदारों ने अतिक्रमण कर रखा है। बारिश के पानी की निकासी का रास्ता नहीं बचा है। कारोबारियों ने अपनी दुकानों के सामने ऊंचा प्लास्टर करवा रखा है जिससे सड़क नीची हो गई है। बारिश में सारा पानी सड़क पर जमा हो जाता है। एनएचएआई अधिकारियों को चिंता है कि कहीं दुकानदार उनकी वर्षा जल संचयन प्रणाली पर भी अतिक्रमण न कर लें।

चिंता जनक है जल स्तर
अरावली पहाडिय़ों पर बसा होने की वजह से आद्योगिक नगरी का भूमिगत जलस्तर पहले ही काफी नीचे है। लगातार दोहन होने से भूमिगत जलस्तर गिरता जा रहा है। जिला प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक औद्योगिक शहर में भूमिगत जल स्तर प्रतिवर्ष 10 फिट गिर रहा है। 12 किलोमीटर लंबाई में फैले रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम से बारिश के मौसम में लाखों लीटर पानी नीचे पहुंचने से जलस्तर गिरने की रफ्तार को घटाया जाएगा।
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