रात में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को वहां से उठा लिया।
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जनकपुरी स्थित एक निजी स्कूल में तीन साल की बच्ची से दुष्कर्म के मामले को लेकर आम आदमी पार्टी ने बुधवार को उपराज्यपाल सचिवालय के बाहर विरोध दर्ज कराया। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष, महिला पार्षदों और नेताओं के साथ राजभवन पहुंचे और घंटों तक वहीं डटे रहे। हालांकि रात में पुलिस ने उनको वहां से उठा लिया। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि बच्ची के परिवार को न्याय दिलाने के बजाय पुलिस अधिकारी के दबाव और धमकियों का सामना करना पड़ रहा है।
आप नेताओं ने उपराज्यपाल से मिलने का समय मांगा था, लेकिन लंबे इंतजार के बाद भी मुलाकात नहीं हो सकी। इस दौरान पार्टी नेताओं ने सचिवालय परिसर के बाहर धरना देकर विरोध जताया। नेताओं ने बताया कि वे किसी राजनीतिक प्रदर्शन के लिए नहीं, बल्कि पीड़ित बच्ची के परिवार को न्याय दिलाने की मांग लेकर पहुंचे थे।
प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि बच्ची की मां ने संबंधित डीसीपी और एसएचओ पर धमकाने व घंटों थाने में बैठाकर परेशान करने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि इतने गंभीर मामले में पुलिस की कार्रवाई बेहद कमजोर रही, जिसके कारण आरोपी को कुछ ही दिनों में जमानत मिल गई। उन्होंने सवाल उठाया कि जब उपराज्यपाल और पुलिस कमिश्नर विपक्षी नेताओं से मिलने तक को तैयार नहीं हैं, तो पीड़ित परिवार को न्याय कैसे मिलेगा।
धरने में शामिल नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है। पार्टी ने दावा किया कि संबंधित स्कूल प्रबंधन से जुड़े कुछ प्रभावशाली लोगों के कारण प्रशासन और पुलिस पर दबाव बनाया जा रहा है। हालांकि, भाजपा और सरकार की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
पूर्व मेयर शैली ओबराॅय ने कहा कि दोपहर से महिला पार्षद और पार्टी नेता उपराज्यपाल सचिवालय के बाहर बैठे रहे, लेकिन उन्हें केवल यह कहकर लौटा दिया गया कि समय ई-मेल के जरिये दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि राजधानी में एक मासूम बच्ची के साथ हुई इतनी गंभीर घटना पर उपराज्यपाल को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए और पीड़ित परिवार को सुरक्षा व न्याय का भरोसा देना चाहिए। आप नेताओं ने मांग की कि संबंधित डीसीपी और एसएचओ के खिलाफ कार्रवाई हो, पीड़ित परिवार को सुरक्षा दी जाए और मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए।