तमाम प्रयासों के बाद भी दिल्ली कोरोना से लड़ाई में पीछे क्यों है और आखिर क्यों यहां केस कम होने का नाम नहीं ले रहे? इन सवालों का जवाब है देर से रिपोर्ट आना। यह उदाहरण कापसहेड़ा के इसी केस में दिखाई देता है जहां 20 और 21 अप्रैल को एनआईबी लैब, नोएडा में सैंपल भेज दिए गए थे लेकिन अब तक करीब 200 सैंपलों में से सिर्फ 67 की रिपोर्ट आई है, वो भी करीब 10 दिन बाद। ऐसे में जब तक अन्य सैंपल की रिपोर्ट आएगी तब तक प्रशासन को कार्रवाई करने में देर हो सकती है और स्थिति गंभीर हो सकती है।
तीन दिन में लैब पहुंच रहे सैंपल, 15 दिन में रिपोर्ट
कोरोना वायरस को लेकर मंगलवार को 90 फीसदी दिल्ली ऑरेंज जोन में तब्दील हो सकती थी, लेकिन जांच रिपोर्ट समय पर नहीं मिलने के कारण ऐसा नहीं हो सका। मरीजों के सैंपल तीन-तीन दिन बाद लैब में जा रहे हैं और इनकी रिपोर्ट करी 15 दिन में आ रही है।
ऐसे में मरीज पॉजिटिव होगा भी तो वह ठीक हो गया होगा या फिर उससे कितने लोग संक्रमित हुए प्रशासन को इसके बारे में कोई जानकारी ही नहीं है। यही नहीं नॉन कोविड अस्पताल, दिल्ली पुलिस और सुरक्षा गार्डों के संक्रमित मिलने के चलते सरकार व प्रशासन भी चिंतित है।