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दिल्ली: फर्जी कागजात के जरिए विदेश व्यापार नीति का फायदा लेकर सरकार को लगाया 30 करोड़ का चूना, दो गिरफ्तार 

Thu, 03 Dec 2020 08:54 PM IST
Mohit Mudgal अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो
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फर्जी कागजात के जरिए विदेश व्यापार नीति का फायदा लेकर सरकार को 30 करोड़ का चूना लगाने वाले दो आरोपियों को आर्थिक अपराध शाखा ने गिरफ्तार किया है। इस फर्जीवाड़े का मुख्य साजिशकर्ता अमेरिका भाग गया है। पुलिस इस मामले में बैंक के अधिकारियों की भूमिका की जांच में जुटी है। 

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शाखा के संयुक्त आयुक्त ओपी मिश्रा ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान तिलक नगर निवासी अंकित कपूर और उत्तम नगर निवासी नवीन गुप्ता के रूप में हुई है। आईसीआईसीआई बैंक की तरफ से फर्जीवाड़ा की शिकायत मिली थी। जिसमें कहा गया कि 17 खाते में जमा कराये गये 467 विदेशी आवक प्रेषण प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए है। यह 2013 से 2015 के बीच कंपनी बनाकर नारायणा के बैंक में जमा करवाये गए।

जिसके आधार पर आईसीआईसीआई बैंक ने विदेश नीति के तहत डीजीएफटी(विदेश व्यापार महानिदेशालय) के कार्यालय से व्यापार(निर्यात) का लाभ लेने वाले खाताधारकों को बैंक प्राप्ति प्रमाण पत्र भी जारी किए थे। इससे सरकारी खजाने में करोड़ों का नुकसान हुआ। 
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शिकायत पर आर्थिक अपराध शाखा ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने जांच के दौरान खाता खोलने वाले 17 कंपनियों के साथ फर्जी एफआईसी जब्त कर ली। बैंक खाता किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर था। तकनीकी जांच और विदेश व्यापार निदेशालय से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने बुधवार को दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। 

पूछताछ में पता चला कि फर्जीवाड़ा का सरगना अंगद पाल सिंह है। जिसके साथ मिलकर आरोपियों ने फर्जीवाड़े को अंजाम दिया। अंकित कपूर एएसके ग्रूप का मालिक है। वह मुख्य आरोपी अंगद पाल सिंह का दोस्त है। अंकित यूके की यूनिवर्सिटी से ग्राफिक डिजाइनिंग में स्नातक कर रहा था। लेकिन बीच में ही वर्ष 2010 में वह भारत आ गया। वर्ष 2012 में वह अंगद के संपर्क में आकर काम करना शुरू कर दिया।

अंकित की कंपनी को 11.94 करोड़ का फायदा हुआ। अंकित के मुताबिक मुख्य आरोपी अंगद अमेरिका भाग चुका है। नवीन गुप्ता सस्पेरिला इंपेक्स कंपनी का मालिक है। नवीन की कंपनी को फर्जी कागजात के जरिए 19.38 करोड़ का फायदा हुआ। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस फर्जीवाड़े में बैंक अधिकारियों की मिलीभगत हो सकती है जिसकी भी जांच की जा रही है। 

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