पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज से दिल्ली पुलिस जंगपुरा से आईएसबीटी कश्मीरी गेट तक पहुंच गई थी। यहां से टिकट बुकिंग खिड़की से लोकेश श्रीवास का मोबाइल नंबर मिल गया था। उसके बाद दिल्ली पुलिस की टीम पीछा करते हुए छत्तीसगढ़ पहुंच गई।
दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर विष्णु दत्त शर्मा और दिनेश को फ्लाइट से छत्तीसगढ़ भेजा गया। यहां पर इन दोनों इंस्पेक्टर ने छत्तीसगढ़ पुलिस के एक हवलदार के साथ आरोपी लोकेश श्रीवास को गिरफ्तार कर लिया। दिल्ली पुलिस अधिकारियों का आरोप है कि उन्होंने छत्तीसगढ़ पुलिस को अपनी मदद के लिए लिया था।
बाद में छत्तीसगढ़ पुलिस को लगा कि मामला बड़ा है तो उन्होंने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। दिल्ली पुलिस अधिकारियों के अनुसार, शिवा को पता था कि श्रीवास ने दिल्ली में चोरी की बड़ी वारदात को अंजाम दिया है।
वह वारदात के दौरान लोकेश के संपर्क में था और उसे लगातार बातचीत कर रहा था। दिल्ली से ही लोकेश ने शिवा को चोरी की ज्वेलरी को बिकवाने का तुरंत इंतजाम करने को कहा था। शिवा तेलंगाना में हुई बड़ी चोरी में लोकेश श्रीवास के साथ नहीं था। लोकेश ने उस चोरी में लोकेश राव का साथ लिया था।