केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पीएम उदय योजना का चुनावी नफे-नुकसान से कोई ताल्लुक नहीं था। चुनाव के दौरान भी यह प्रक्रिया चल रही थी। नतीजा 2.15 लाख लोगों के रजिस्ट्रेशन के तौर पर रहा। इनको कन्वेंस डीड देने की प्रक्रिया चल रही है। इसी कड़ी में शुक्रवार को 32 लोगों को भी डीड सौंपी गई है। यह आगे अब अपनी रजिस्ट्री करवा सकेंगे। इससे पहले तीन जनवरी को रोहिणी विधानसभा क्षेत्र के सूरज पार्क व राजा विहार कॉलोनी के 20 लोगों को रजिस्ट्री सौंपी गई थी।
तो इसलिए दिया मालिकाना हक
हरदीप सिंह पुरी ने स्पष्ट किया कि अगर पुराने कानून कायदों के हिसाब से कॉलोनियों को नियमित किया जाता तो उसे पूरा करने में दस साल लग जाते। इससे बचने के लिए सरकार ने नया कानून बनवाया। इस कानून से सरकार लोगों को मालिकाना हक पहले दे देगी। बाद में डीडीए कॉलोनियों के पुनर्विकास की विस्तृत योजना तैयार करेगा। रजिस्ट्री कराने के दौरान जो शुल्क जमा होगा, उससे विशेष विकास कोष का गठन कर कॉलोनियों का विकास होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि डीडीए ने अनधिकृत कॉलोनियों के भू-उपयोग में परिवर्तन किया है। इसके आधार पर मालिकाना हक दिया जा रहा है।
डीडीए अधिकारियों का कहना है कि कॉलोनियों को नियमित करने से पहले उप नियमों को तैयार किया जा रहा है। इसमें सड़क, नाली, पार्क समेत दूसरी सार्वजनिक सुविधाओं के विकास के लिए उपलब्ध जमीन के हिसाब के नियमों में छूट दी जा रही है। इसका ड्राफ्ट तैयार है। एक महीने के भीतर इसे फाइनल कर लिया जाएगा। उसके बाद डीडीए कॉलोनियों को ले-आउट प्लान बनाएगा।
आम लोगों से मिलने वाले शुल्क से बनेगी विशेष विकास निधि
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि आम लोगों से लिए जाने वाले शुल्क से विशेष विकास निधि तैयार की जाएगी। इससे इलाके में सामाजिक ढांचे का निर्माण होगा। वहीं, कॉलोनियों के पुनर्विकास के लिए डीडीए नियम आदि बनाकर ले-आउट प्लान तैयार करेगा। इसमें जरूरत के हिसाब से बुनियादी सुविधाओं का विकास होगा।
50 हेल्प डेस्क कर रहे काम
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में अभी तक 50 हेल्प डेस्क काम कर रहे हैं। आवेदन करने वाले यहां अपनी हर छोटी-बड़ी आशंकाओं का समाधान ले सकते हैं। यहां तक कि हेल्प डेस्क से ऑनलाइन फार्म भी भरवाए जा रहे हैं। यही नहीं, जरूरत होने पर डीडीए की टीमें भी अलग-अलग इलाकों में भेजी जा रही हैं।