दिल्ली में 24 अगस्त से फायर एनओसी जारी नहीं की गई हैं। डीरेग्यूलेशन नियमों के तहत तीसरे पक्ष को प्रमाणपत्र जारी करने की जिम्मेदारी सौंपी जानी थी, लेकिन मानदंड पूरे करने वाले आवेदक नहीं मिले।
दिल्ली फायर सर्विस (डीएफएस) के मुख्य अग्निशमन अधिकारी एके मलिक ने बताया है कि 24 अगस्त से फायर एनओसी जारी नहीं की गई हैं। इसका कारण यह है कि सरकार की डीरेग्यूलेशन दिशानिर्देशों के तहत, फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट जारी करने के लिए तीसरे पक्ष को शामिल किया जाना था।
विज्ञापन
नियमों में संशोधन और तीसरे पक्ष की भूमिका
डीएफएस नियमों में मई में संशोधन किया गया था, जिसके तहत नियमों 35 और 37 के प्रभावी होने के 90 दिनों के बाद, फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट जारी करने और नवीनीकरण की जिम्मेदारी तीसरे पक्षों को सौंपी गई थी। इस अवधि के दौरान, तीसरे पक्षों को पैनल में शामिल करने के लिए दो बार नोटिस जारी किए गए थे। हालांकि, प्राप्त आवेदनों की संख्या बहुत कम थी और कोई भी आवश्यक मानदंडों को पूरा नहीं करता था। परिणामस्वरूप, अब तक किसी भी तीसरे पक्ष को पैनल में शामिल नहीं किया गया है।
अनाधिकृत कॉलोनियों में अग्नि सुरक्षा की चुनौती
दिल्ली में तेजी से बढ़ रही हाईराइज इमारतों में अग्नि सुरक्षा नियमों का पालन अधिकृत और नई इमारतों तक ही सीमित है। अनाधिकृत कॉलोनियों में बिजली के तारों का अव्यवस्थित जाल और पुराने वायरिंग सिस्टम पर अत्यधिक लोड के कारण शॉर्ट सर्किट की घटनाएं आम हैं, जो आग लगने की 80 प्रतिशत से अधिक घटनाओं का कारण बनती हैं।
विज्ञापन
अनिवार्य फायर एनओसी और संबंधित श्रेणियां
दिल्ली फायर सर्विस के अनुसार, 11 श्रेणियों की इमारतों के लिए फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट (फायर एनओसी) अनिवार्य है। इनमें 15 मीटर से ऊंचे आवासीय और व्यावसायिक भवन, 12 मीटर से ऊंचे होटल व गेस्ट हाउस, 9 मीटर से ऊंचे शैक्षणिक, संस्थागत और वाणिज्यिक भवन, 250 वर्गमीटर से बड़े सभा भवन, औद्योगिक भवन और भंडारण भवन, 100 वर्गमीटर से बड़े खतरनाक भवन, और दो या अधिक स्तर वाले बेसमेंट वाले भवन शामिल हैं।