कोरोना से ठीक होने के बाद भी करीब 30 फीसदी लोग मानसिक समस्याओं से जूझ रहे हैं। डॉक्टरो का कहना है कि भविष्य में दोबारा संक्रमित होने की चिंता, मानसिक तौर पर थकावट और तनाव तथा शरीर में पहले जैसी ऊर्जा का न बचना जैसे कारणों से लोगों को ऐसी दिक्कते आ रही हैं। इन बीमारियों का समय पर इलाज नहीं होता तो यह गंभीर मानसिक समस्या बन जाती है।
राजीव गांधी अस्पताल के डॉक्टर और कोविड 19 के नोडल अधिकारी डॉ. अजित जैन बताते हैं कि स्वस्थ होने के बाद जिन लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हो रही हैं उनका इलाज किया जा रहा है। इनमें करीब 40 फीसदी मरीज नींद न आना, घबराहट, बय, मानसिक थकावट, तनाव, अचानक पूरे शरीर में कंपकंपी होना, घुटन की हद तक सांस फैलने लगना जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं।
ये मरीज बताते हैं कि उन्हे अब रात में नींद नहीं आती। हमेशा डर बना रहता है और जीवन में तनाव रहता है। जो मरीज आईसीयू से ठीक होकर गए हैं उन्हे यह समस्या सबसे ज्यादा है। उन्हे डर है कि अगर दोबारा संक्रमित हो गए तो क्या होगा। इसीलिए उन्हे सकारात्मक सोच पर ध्यान देने के लिए कहा जा रहा है। प्रतिदिन योग करना बहुत जरूरी है।