सीबीआई ने टूजी स्पेक्ट्रम घोटाले से जुड़े दूसरे मामले में निचली अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। यह मामला एस्सार टेलीकॉम व लूप टेलीकॉम को स्पेक्ट्रम आवंटन से जुड़ा है। निचली अदालत ने इस मामले में भी सभी आरोपियों व कंपनियों को बरी कर दिया था। याचिका पर शुक्रवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हो सकती है।
बता दें कि पटियाला हाउस स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने ठोस साक्ष्यों के अभाव में पूर्व केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ए राजा व सांसद कनिमोझी समेत 17 आरोपियों को सीबीआई के दो व ईडी के एक मुकदमे से बरी कर दिया था।
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एजेंसी की ओर से दायर अपील एस्सार समूह के प्रमोटर रविकांत रुइया, अंशुमन रुइया और लूप टेलीकॉम के प्रमोटर आईपी खेतान, किरण खेतान, एस्सार समूह के निदेशक विकास सर्राफ व तीन टेलीकॉम कंपनियों लूप टेलीकॉम, लूप मोबाइल व एस्सार टेलीहोल्डिंग को बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ है।
सीएजी ने 1.76 लाख करोड़ का घोटाला होने की बात कही थी
2G स्कैम
सीबीआई ने याचिका में कहा है कि निचली अदालत ने आरोपियों को बरी करने का फैसला गलत सुनाया है। अभियोजन की ओर से ठोस साक्ष्य मुहैया कराए गए थे, लेकिन निचली अदालत ने इन पर ठीक से विचार नहीं किया।
एजेंसी के मुताबिक, सीएजी ने टूजी स्पेक्ट्रम आवंटन के मामले में 1.76 लाख करोड़ का घोटाला होने की बात कही थी। जांच के बाद यह घोटाला सीबीआई ने 30 हजार करोड़ का बताया था। इन आरोपों को सीबीआई अदालत में साबित नहीं कर सकी थी।
सीबीआई के दूसरे केस में एस्सार समूह के प्रमोटर रवि रुइया, अंशुमन रुइया, लूप टेलीकॉम के प्रमोटर किरण खेतान, उनके पति आईपी खेतान, एस्सार समूह के निदेशक (स्ट्रेटजी एंड प्लानिंग) विकास सर्राफ को आरोपी बनाया गया था। सीबीआई कोर्ट में तीसरा आरोप-पत्र प्रवर्तन निदेशालय ने अप्रैल 2014 में 19 आरोपियों के खिलाफ दाखिल किया था।