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राहत: कोरोना से होने वाली मौतों में 95 फीसदी की कमी, अप्रैल-मई में 200 से अधिक था आंकड़ा

Sat, 26 Jun 2021 06:20 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले दो सप्ताह से अस्पतालों में नए मरीज न के बराबर ही भर्ती हो रहे हैं। इससे मौत के मामलों में कमी आ रही है। हालांकि, अगली लहर के खतरों को देखते हुए सभी सावधानियां बरतने की जरूरत है। 
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फाइल फोटो - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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राजधानी में  कोरोना के दैनिक मामलों में लगातार आ रही कमी के बाद अब मौत के आंकड़े भी कम होने लगे हैं। पिछले एक सप्ताह से प्रतिदिन औसतन 9 लोग जान गंवा रहे हैं। 15 अप्रैल से लेकर मई तक यह संख्या 200 से अधिक थी। इस लिहाज से देखे तो मौतों में  95 फीसदी की कमी आ गई है।

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विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले दो सप्ताह से अस्पतालों में नए मरीज न के बराबर ही भर्ती हो रहे हैं। इससे मौत के मामलों में कमी आ रही है। हालांकि, अगली लहर के खतरों को देखते हुए सभी सावधानियां बरतने की जरूरत है। 

दिल्ली में अब तक 24 हजार से ज्यादा लोग संक्रमण से जान गंवा चुके हैं।  मार्च में कोरोना की शुरुआत के बाद सबसे भयावह हालात दूसरी लहर में रहे। तब अप्रैल और मई के 60 दिनों में  करीब 13 हजार मौतें हुई थी। दूसरी लहर में एक दिन का अधिकतम आंकड़ा 448 तक पहुंच गया था।
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तब रोजाना औसतन 200 से ज्यादा लोग वायरस का शिकार हो रहे थे,लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। पिछले एक सप्ताह में 59 लोगों की मौत हुई है। यानी, प्रतिदिन औसतन 9 लोगों ने जान गंवाई है। फरवरी के बाद ऐसा पहली बार है जब यह आंकड़ा इतना कम हुआ है। रोजाना हो रही मृत्यु कि संख्या 207 से घटकर चार पर पहुंच गई गई है।

वरिष्ठ चिकित्सक प्रवीण सिंघल का कहना है कि दो माह पहले तक अस्पतालों में 20 हजार से ज्यादा मरीज भर्ती थे। इनमें से अधिकतर कि हालात गंभीर थी। वेंटिलेटर सपोर्ट पर जाने वाले हर 10 में से 7 लोगों की मौत हो रही थी। यही कारण था कि अप्रैल और मई में रिकॉर्ड स्तर पर मौतें हो रही थी,लेकिन अब अस्पतालों में करीब 1 हजार मरीज ही है। नए मामले भी न के बराबर ही आ रहे हैं। इससे मौतों की संख्या कम हो रही है।

डॉक्टर ने कहा कि कोरोना को नियंत्रण में रखना लोगों के हाथों में है। अगर सब यह याद रखे कि अप्रैल में हालात कैसे थे और लॉकडाउन खुलने के बाद अब मास्क, दो गज की दूरी का पालन करें। सभी पात्र लोग टीका भी लगवा लें तो कोरोना की अगली लहर से बचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि कोरोना के प्रसार का खतरा उसके स्ट्रेन से होता है। वायरस खुद को कितना भी बदले अगर लोग मास्क लगाकर रखेंगें और वैक्सीन भी लगवा लेंगे तो संक्रमण का खतरा नहीं होगा।

एक सप्ताह से संक्रमण दर 0.50 फीसदी से कम
दिल्ली में पिछले एक सप्ताह से संक्रमण दर 0.50 फीसदी से कम बनी हुई है।ठीक 55 दिन पहले यह दर 30 फीसदी थी, जो अब 0.15 प्रतिशत है। यानी, एक हजार लोगों की जांच पर सिर्फ 1 संक्रमित मिल रहा हैं। जीटीबी अस्पताल के डॉक्टर विनय कुमार बताते हैं कि संक्रमण दर लगातार कम हो रही है। इससे पता चलता है कि अब वायरस का प्रसार नहीं हो रहा है। लेकिन नए वैरिएंट को देखते हुए वापस पहले की तरह नियमों का पालन करना होगा। नहीं तो परिणाम घातक हो सकता है।

70 फीसदी से ज्यादा आरटी-पीसीआर जांच हो रही
दिल्ली में 70 फीसदी से ज्यादा आरटी-पीसीआर जांच की जा रही है। पिछले आठ दिनों में हुई कुल 693,524 जांच में 534,727 आरटी-पीसीआर प्रणाली से थी, जो कुल जांच का 74 फीसदी है। डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना की गोल्डन जांच बढ़ने से सही प्रकार से संक्रमितों की पहचान होती है। इन जांच के बढ़ने के बावजूद भी मामले नहीं बढ़ रहे हैं।
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पिछले एक माह में ऐसे कम हुई मौतें
दिन-     मौतें

24 मई-207
30-73
5 जून-60
10-44
15-12
20-07
25-04

नोट- आंकड़े स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक हैं

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