प्रख्यात साहित्यकार और आलोचक डॉ नामवर सिंह के निधन से साहित्य जगत में दुख की लहर है। उनका साहित्य अकादमी से गहना नाता था। उनके देहांत की खबर के बाद से साहित्य अकादमी सहित अन्य साहित्यिक संस्थानों में शोक सभाएं की गईं। साहित्य अकादमी से जुड़े प्रकाशकों ने भी इसे बेहद दुख की घड़ी बताया है।
साहित्य अकादमी के सचिव के श्रीनिवास राव ने कहा कि डॉ नामवर सिंह साहित्य अकादमी के महत्तर सदस्य थे। 20वीं सदी के छठे दशक से हिंदी आलोचना के क्षेत्र में वे सक्रिय रहे। हिंदी साहित्य के मूल्यांकन और दिशा-निर्धारण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
नामवर सिंह कबीर की तरह वैचारिक प्रस्ताव रखते रहे। वह रूढ़िवादी चिंतन, अंधविश्वास, कलावाद, व्यक्तिवाद आदि के खिलाफ चिंतन को प्रेरित करते रहे और नई चेतना का प्रसार करते रहे। जागरूक आलोचक की विश्लेषण क्षमता, साहित्य के मर्म की गहरी समझ और तथ्यों को तार्किक रूप से प्रस्तुत करने की उनकी अभिनव शैली उनके सृजनकर्म को विशिष्ट बनाती है।
कई साहित्यिक संस्थाओं में रहे सक्रिय
साहित्यकार और शिक्षक के रूप में अपनी व्यस्तता के बावजूद नामवर सिंह कई साहित्यिक संस्थाओं के साथ कार्यकारी भूमिकाओं में सक्रिय रूप में संबद्ध रहे। वे साहित्य अकादमी, भारतीय ज्ञानपीठ, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान, राजा राममोहन राय पुस्तकालय संस्थान तथा प्रगतिशील लेखक संघ शामिल थे। साहित्य अकादमी को उनका मार्गदर्शन और स्नेह प्राप्त था।
प्रतिमान के लिए मिला साहित्य अकादमी पुरस्कार
डॉ. नामवर सिंह को उनकी पुस्तक कविता के नए प्रतिमान पर 1971 का साहित्य अकादमी पुरस्कार प्रदान किया गया था। 27 मार्च 2018 को साहित्य अकादमी ने उन्हें अपने सर्वोच्च सम्मान ‘महत्तर’ सदस्यता से सम्मानित किया था।
डॉ नामवर के जाने से हुई है बड़ी क्षति : राजकमल प्रकाशन
राजकमल प्रकाशन के अध्यक्ष अशोक महेश्वरी ने कहा कि डॉ नामवर का जाना वर्तमान समय में हिंदी आकाशगंगा से उसके सूर्य का चले जाना है। नामवर सिंह भारतीय साहित्य में बड़े आलोचक थे। उन्होंने हिंदी आलोचना को एक नया मोड़ दिया और वाद-विवाद-संवाद की परंपरा को नए आयाम दिए। नामवर सिंह आलोचना पत्रिका के आजीवन संपादक रहे। उन्होंने कहा कि मेरे लिए वे पितातुल्य थे। शीला संधू के समय से अब तक राजकमल की जैसी निर्मिती है, उसमें उनका योगदान अविस्मरणीय है। उन्होंने राजकमल प्रकाशन का वैचारिक मानदंड स्थिर किया। उसे मजबूती देने में हमेशा सहयोग किया। राजकमल परिवार अपने वरिष्ठतम अभिभावक के चले जाने से अत्यंत शोक में है।