इलाज के दौरान महिला मरीज की मौत के मामले में पुलिस ने करोलबाग स्थित अस्पताल के मालिक व डॉक्टर और ओटी इंचार्ज के खिलाफ चार्जशीट पेश की है।
अदालत के निर्देश पर पुलिस ने 2008 में एफआईआर दर्ज की थी। महिला के पति ने अदालत में याचिका दायर कर मुकदमा दर्ज करने की मांग की थी।
तीस हजारी स्थित सीएमएम कोर्ट में पुलिस ने अपनी चार्जशीट में जीवन अस्पताल के मालिक डॉ. विकेश सभरवाल, ओटी इंचार्ज पूनम रानी, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. कोकिला गुलाटी के खिलाफ धोखाधड़ी, लापरवाही से जान लेने समेत आईपीसी की कई धाराएं लगाई हैं।
पुलिस ने चार्जशीट में आरोप लगाया है कि जीवन अस्पताल का पंजीकरण 2004 में ही समाप्त हो चुका था और इसका नवीनीकरण नहीं कराया गया था। इसके अलावा जिस महिला को ओटी इंचार्ज बनाया गया था वह केवल हेल्पर थी। महिला को ऑपरेशन से पहले एनेसथिसिया का ओवर डोज दिया गया जिससे उसकी मौत हो गई।
पेश मामले के अनुसार कनिका सिंघल को सात सितंबर 2007 को करोल बाग ईस्ट पार्क स्थित जीवन अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कनिका को दूसरे बच्चे के जन्म के बाद से काफी दिक्कत हो रही थी। अस्पताल की मालकिन सरिता सभरवाल उनकी जानकार थीं। सरिता ने कनिका को उसके अस्पताल में ऑपरेशन कराने के लिए मना लिया था।
ऑपरेशन के दौरान ही अस्पताल में शाम साढ़े सात बजे कनिका की मौत हो गई थी। अस्पताल ने इस तथ्य को परिजनों से छिपाया और शव को देखने नहीं दिया। मृतका के पति सुभाष सिंघल ने पुलिस को मामले की सूचना दी थी लेकिन मुकदमा दर्ज नहीं किया गया था।
इसके बाद सुभाष ने 20 फरवरी 2008 को याचिका दायर कर जीवन अस्पताल, उसके मालिक डॉ. विकेश सभरवाल, सरिता सभरवाल, डॉ. असीम सभरवाल, डॉ. विनय सभरवाल, ओटी इंचार्ज पूनम रानी, डॉ. कोकिला गुलाटी, ओटी अटेंडेंट दिनेश व डीबीजी रोड थाने के एसएचओ के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की थी।