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पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की पुण्यतिथि पर विशेष:  इस शहर से रहा है पुराना नाता

Mon, 31 Jul 2017 10:47 AM IST
शाहनवाज आलम/अमर उजाला, गुरुग्राम

सार

बहुत याद आते हैं मिसाइलमैन 


 
 
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विस्तार
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पूर्व राष्ट्रपति और देश की सेना को मिसाइल से लैस करने वाले मिसाइल मैन डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की दूसरी पुण्यतिथि आज है। आज ही के दिन डॉ. कलाम दुनिया को अलविदा कहकर चले गए थे। मगर, उनसे मिल चुके लोगों के लिए उनकी कही बात आज भी उनके जहन में है।
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डॉ. कलाम के विचार जहां युवाओं में जोश भर देते थे। वहीं शिक्षकों को न्यू इंडिया’ बनाने का विजन देते थे। डॉ. कलाम का साइबर सिटी से पुराना नाता रहा है। नेशनल ब्रेन रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनबीआरसी) और नेशनल सिक्योरिटी गारड (एनएसजी) को कलर  गुरुग्राम की जमीं से डॉ. कलाम ने देश को समर्पित किया था।

कई मौके पर वह यहां आते रहे हैं। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम मेमोरियल ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष नौशाद अख्तर कहते हैं देश की इस हर दिल अजीज शख्सियत को साइबर सिटी से खास लगाव था। वह यहां आने का कोई मौका नहीं छोड़ते थे।
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एनबीआरसी और भोड़ाकलां स्थित रिट्रीट सेंटर का उद्घाटन उन्होंने ही किया था। मारुति कंपनी के कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के लिए भी वह यहां आते रहे हैं। आईटीएम यूनिवर्सिटी (अब नॉर्थकैंप यूनिवर्सिटी) के दीक्षांत समारोह में आधे घंटे तक यहां युवाओं को प्रेरित किया था।

बतौर राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम मानेसर स्थित मारुति-सुुजुकी प्लांट में 25 मई, 2007 को आए थे। वहां कलाम से मिलने वाले आज भी खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।

उन्होंने कंपनी के विजिटर बुक में अपने यह शब्द टाइम हैज कम टू लॉन्च न्यू मॉडल्स ऑफ मारुति डिजाइनिंग, मारुति डेवलप्स एंड मारुति प्रोड्यूस्ड कार्स कंपटेटिविली फॉर नेशनल एंड इंटरनेशनल मार्केट’ अंकित किए थे।
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युवाओं में भर देते थे जोश 

सेक्टर-23ए स्थित आईटीएम यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में 10 मार्च, 2011 को आए थे। जिस कार्यक्रम में आए युवाओं को उनकी ताकत का एहसास करवाते रहे। यूनिवर्सिटी में उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे नौकरी खोजने वाले नहीं बल्कि देने वाला बनने का प्रयास करें।

यूनिवर्सिटी के प्रो-वाइस चांसलर एसके शर्मा उनसे जुड़ी बातें बताते हैं कि जब वह यूनिवर्सिटी आए थे, एक-एक कर सभी बच्चों से मिले थे। बच्चों ने उन्हें घेर लिया था। हर किसी से ड्रीम पूछा और वहां पहुंचने तक की राह भी बताई।  

एमिटी यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रो. पीबी शर्मा कहते हैं कई मौके पर डॉ. कलाम से मुलाकात हुई। अप्रैल 2002 में राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में जब वह आए थे, तब राष्ट्रपति नहीं थे। हमेशा वह शिक्षकों को ‘न्यू इंडिया’ गढ़ने का विजन देते थे। अपने 2020 विजन से रूबरू कराते थे। वैज्ञानिकों को समाज के अनुरूप अविष्कार पर जोर देते थे। गांवों के विकास के लिए पूरा सिद्धांत दिया है।
 
उनके नाम से शहर में एक पत्थर तक नहीं
डॉ. कलाम का नाता भले ही शहर से रहा, लेकिन इसके बावजूद कलाम के नाम पर शहर में एक पत्थर तक नहीं लगा है। पिछले साल उनके देहांत के समय नगर निगम के मेयर ने कलाम को श्रद्धांजलि स्वरूप साइबर सिटी की किसी सड़क का नामकरण उनके नाम पर करने का ऐलान किया था, मगर इस पर अब तक अमल नहीं किया गया है।

डॉ. कलाम मेमोरियल ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष नौशाद अख्तर कहते हैं प्रशासन को यहां कलाम साहब की निशानी के तौर पर किसी कॉलेज, लाइब्रेरी या बनने वाली नई यूनिवर्सिटी का नामकरण करना चाहिए। अलग से नॉलेज सेंटर भी स्थापित किया जा सकता है।
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