दिल्ली के इंफ्रास्ट्रक्चर और हाउसिंग विकास के लिए अहम मानी जा रही बैठक में डीडीए ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 14,962 करोड़ रुपये का बजट मंजूर कर दिया। उपराज्यपाल वीके सक्सेना की अध्यक्षता में हुई अथॉरिटी बैठक में बताया कि डीडीए ने 18 फरवरी तक 2025-26 में 2,112 करोड़ रुपये का राजस्व अधिशेष दर्ज किया है। लगातार तीसरे साल सरप्लस दर्ज कर डीडीए घाटे से मुनाफे की स्थिति में पहुंच गया है।
डीडीए भी करेगा आउटडोर विज्ञापन से कमाई
डीडीए अपनी साइट्स पर आउटडोर विज्ञापन से कमाई करने की योजना बना रहा है। इसके लिए मार्केट असेसमेंट और रेवेन्यू फ्रेमवर्क तैयार करने का टेंडर जारी किया है। अमूमन डीडीए भूमि संपत्ति का प्रबंधन करता है। इसका मुख्य फोकस आवासीय, वाणिज्यिक व ढांचागत विकास पर रहा है। अब विज्ञापन से उसके राजस्व ढांचे में नया आयाम जुड़ सकता है।
डीडीए के हॉर्टिकल्चर सिविल डिवीजन-7 ने इसके लिए ई-टेंडर जारी किया है। चयनित एजेंसी डीडीए की चिन्हित साइट्स का सर्वे करेगी और जीआईएस आधारित मैपिंग तैयार करेगी। इसके अलावा संभावित विज्ञापन जोन तय किए जाएंगे, बाजार दरों की तुलना की जाएगी और अलग-अलग श्रेणियों के लिए मूल्य निर्धारण मॉडल बनाया जाएगा।
एजेंसी को साइट-वार संभावित आय का आकलन, फाइनेंशियल मॉडलिंग, सुझाए गए विज्ञापन फॉर्मेट के मॉक-अप और एक विस्तृत अंतिम रिपोर्ट भी देनी होगी। पूरा काम डीडीए के साथ परामर्श कर किया जाएगा। उद्देश्य यह है कि विज्ञापन स्थलों की वैज्ञानिक पहचान हो और दरें तर्कसंगत तरीके से तय हों, ताकि प्राधिकरण को दीर्घकालीन और पारदर्शी आय मिल सके। तकनीकी रूप से योग्य एजेंसियों में से सबसे उपयुक्त वित्तीय प्रस्ताव को काम सौंपा जाएगा। एजेंसी के पास बाजार की समझ, आउटडोर विज्ञापन की रणनीति, सार्वजनिक संपत्तियों के मूल्य निर्धारण का मॉडल बनाकर देना होगा।
अतिरिक्त राजस्व के नए स्रोत खुलेंगे
डीडीए का मानना है कि इस पहल से उसकी परिसंपत्तियों का बेहतर उपयोग होगा और अतिरिक्त राजस्व के नए स्रोत खुलेंगे। अभी तक नगर निगम स्तर पर विज्ञापन से आय होती रही है, लेकिन अब डीडीए भी अपने नियंत्रित क्षेत्रों में व्यवस्थित विज्ञापन नीति लागू कर आय बढ़ाने की तैयारी में है।
डीडीए की संपत्तियां
यूईआर-2 और एनएच-44 के आस-पास बुनी जा रही आधुनिक खेल सिटी की तस्वीर
दिल्ली के उत्तरी छोर पर स्थित नरेला अब नए विकास मॉडल के रूप में उभरने जा रहा है। यूईआर-2 और एनएच-44 (जीटी करनाल रोड) के इर्द-गिर्द आधुनिक खेल सिटी बसाने की योजना को मंजूरी मिल गई है। फोकस में नरेला सब सिटी है, जहां डीडीए और दिल्ली सरकार मिलकर आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, मेट्रो, खेल सुविधाएं और आवासीय परियोजनाओं के साथ एक नए शहर की तस्वीर तैयार कर रहे हैं।
डीडीए ने मास्टर प्लान-2021 के तहत नरेला के सेक्टर जी-3 और जी-4 में मल्टी स्पोर्ट्स इंटीग्रेटेड स्टेडियम और स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के विकास नियंत्रण मानदंडों को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के साथ यहां विश्वस्तरीय खेल परिसर बनाने का रास्ता साफ हो गया है। प्रस्तावित परिसर में अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर की प्रतियोगिताएं आयोजित की जा सकेंगी। इससे दिल्ली खेल मानचित्र पर मजबूत पहचान बना सकेगी और युवाओं को आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी।
पहुंच बेहद आसान होगी
रणनीतिक रूप से यह क्षेत्र यूईआर-2 और एनएच-44 से जुड़ा है, जिससे यहां पहुंचना आसान होगा। बेहतर सड़क संपर्क के कारण यह खेल सिटी केवल दिल्ली ही नहीं, बल्कि हरियाणा और आसपास के राज्यों के खिलाड़ियों और दर्शकों के लिए भी सुविधाजनक होगी। परियोजना से खेल पर्यटन को बढ़ावा मिलने और रिटेल, होटल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में निवेश बढ़ने की उम्मीद है। स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
मेट्रो विस्तार की भूमिका होगी खास
नरेला के विकास की तस्वीर को मजबूती देने में मेट्रो विस्तार बड़ी भूमिका निभाएगा। रिठाला से कुंडली तक रेड लाइन के विस्तार की परियोजना को परिवर्तनकारी कदम माना जा रहा है। यह विस्तार उत्तर-पश्चिम दिल्ली, रोहिणी और नरेला सब सिटी को हरियाणा से सीधे जोड़ेगा। प्रस्तावित मेट्रो डिपो इस क्षेत्र के विकास का केंद्र बनेगा। मेट्रो लाइन शुरू होने से हजारों यात्रियों को राहत मिलेगी, जो अभी भीड़भाड़ वाली सड़कों पर निर्भर हैं। सफर का समय घटेगा और ट्रैफिक का दबाव कम होगा। साथ ही यह पर्यावरण के लिहाज से भी फायदेमंद होगा, क्योंकि निजी वाहनों की संख्या घटने से प्रदूषण में कमी आएगी।
राजधानी का नया ग्रोथ सेंटर
नरेला सब सिटी में डीडीए की नई आवासीय परियोजनाएं पहले से चल रही हैं। प्रस्तावित यूनिवर्सिटी हब भी मेट्रो कॉरिडोर के पास ही विकसित किया जाना है। बेहतर कनेक्टिविटी से यहां शिक्षा, आवास, रिटेल और सेवा क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा मिलेगा। यूईआर-2 और एनएच-44 के आसपास मॉडर्न सिटी विकसित करने की यह योजना नरेला को नई पहचान देगी। खेल परिसर, मेट्रो, चौड़ी सड़कें और योजनाबद्ध विकास मिलकर इसे राजधानी का नया ग्रोथ सेंटर बना सकते हैं।