फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हद हो गई! कोर्ट में पेश कर दी झूठी तस्वीर

विज्ञापन
विज्ञापन
डीडीए और एमसीडी के अधिकारी राजधानी की सड़कों को साफ करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे। इतना ही नहीं वे इस मामले में अदालत को भी गुमराह करने से पीछे नहीं हट रहे।
विज्ञापन


ऐसे ही एक मामले में अधिकारियों ने सॉफ्टवेयर फोटोशॉप की मदद से द्वारका क्षेत्र में कूडे़ से पटी सड़कों के फोटो से गंदगी को हटाकर उन्हें पेश कर दिया। इस पर नाराजगी जताते हुए बुधवार को हाईकोर्ट ने फोटो से छेड़छाड़ करने वाले अधिकारी का नाम बताने का निर्देश दिया। इसके अलावा दो सप्ताह में सड़कों व फुटपाथ की स्थिति में सुधार पर रिपोर्ट दाखिल करने को कहा। अगली सुनवाई 30 सितंबर को होगी।

इवानी अग्रवाल ने याचिका में आरोप लगाया था कि द्वारका क्षेत्र में कूड़े के ढेर लगे हैं। सड़कों व फुटपाथ टूटे और कई स्थानों पर सीवर के मेनहोल के ढक्कन खुले हैं। याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति बीडी अहमद व न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल की खंडपीठ ने डीडीए व साउथ एमसीडी को जवाब तलब किया था।
विज्ञापन

'फोटो से की गई छेड़छाड़'

बुधवार को डीडीए व एमसीडी ने कोर्ट में फोटो समेत जवाब पेश किया। अधिकारियों ने बताया कि हमने सब कुछ ठीक कर दिया है। पहले खंडपीठ ने सड़कों के कुछ फोटो देखकर डीडीए व एमसीडी के कामकाज पर संतुष्टि जताई, लेकिन कुछ और फोटो देखने के बाद कोर्ट ने कहा कि फोटो से छेड़छाड़ की गई है।

हम ज्यादा टेक्निकल तो नहीं है, लेकिन इतना जरूर कह सकते हैं कि फोटोशॉप से सड़कों और फुटपाथ को चमकाया गया है। नाराजगी जताते हुए खंडपीठ ने कहा कि कोर्ट को गुमराह किया गया है। यह किस अधिकारी की हरकत है। इस दौरान याची भी फोटो में दिख रहे रास्ते को देखकर आश्चर्यचकित रह गई।

उसने कहा कि वह सुबह ही इस रास्ते से होकर आई है, वहां सभी तरफ गंदगी भरी पड़ी है। डीडीए व एमसीडी के अधिवक्ता ने सफाई देते हुए कहा कि हमें ऐसा करने की जरूरत नहीं है। हम अपना काम पहले से ही कर रहे हैं। खंडपीठ ने अधिवक्ता के  तर्क को खारिज कर फोटो से छेड़छाड़ करने वाले अधिकारी का नाम बताने का निर्देश दिया।
विज्ञापन

डीटीसी बस में चढ़ने से पहले सावधान!

डीटीसी में फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस से बसों को चलाने के आरोप को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। अदालत ने कहा कि डीटीसी बसों में रोजाना हजारों सफर करते हैं। लोगों के जीवन से खिलवाड़ किया जा रहा है। अदालत ने फटकार लगाते हुए कहा कि लगता है कि देश में कोई कानून काम ही नहीं कर रहा। अदालत ने डीटीसी से इस मुद्दे पर जवाब तलब किया है।

न्यायमूर्ति बीडी अहमद व न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि यह गंभीर मामला है और इस प्रकार लोगों को मरने के लिए नहीं छोड़ा जा सकता। अदालत ने डीटीसी को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि आपके पास कितने ड्राइवर हैं और उनकी चिकित्सा जांच के क्या उपाय किए गए हैं। इसके अलावा कितने ड्राइवर मेडिकल में फेल पाए गए।

कोर्ट ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई ठोसजनक जवाब दाखिल नहीं किया गया तो डीटीसी चेयरमैन को व्यक्तिगत रूप से तलब किया जाएगा। अदालत ने मामले की सुनवाई 15 अक्तूबर तय की है।

खंडपीठ ने आजाद दस्ता संकल्प हमारा नामक एनजीओ व एक अन्य याचिका पर सुनवाई कर रह है। याची ने आरोप लगाया कि डीटीसी बस चलाने वाले कई ड्राइवरों के पास फर्जी लाइसेंस हैं और काफी चिकित्सा में फेल हो गए हैं। बावजूद इसके डीटीसी प्रशासन ऐसे ड्राइवरों से बस चलवा रहा है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें