दिल्ली सचिवालय में कार्यरत अधिकारी और कर्मचारी अपने नन्हें-मुन्नों बच्चों को अब घर छोड़ने के बजाय साथ ले जा सकेंगे। दिल्ली सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग ने दिल्ली सचिवालय में एक शिशुगृह बनाया है। इसमें सचिवालय में काम करने वाले माता-पिता ना केवल बच्चों के समय बिता पाएंगे, बल्कि निश्चिंत होकर अपना काम भी कर सकेंगे।
शुक्रवार को उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने दिल्ली सचिवालय में शिशुगृह का उद्घाटन किया। इस अवसर पर दिल्ली के मुख्य सचिव विजय देव भी उपस्थित थे। शिशुगृह को दिल्ली सचिवालय की दूसरी मंजिल पर बनाया गया है। यहां बच्चों को खेलने, खाने व सोने की सुविधा भी मिलेगी।
इसमें सोने के लिये दो कमरे हैं, जिनमें 4 बेड हैं। एक खेल का कमरा, दो ड्रेसिंग रूम और एक बड़ा लिविंग एरिया है। इसकी शुरुआत के पीछे दिल्ली सरकार का विचार यह था कि सरकारी कार्यालयों में काम करने वाले बहुत से कर्मचारियों और अधिकारियों को अपने छोटे बच्चों को कार्यालय आने से पहले घर में किसी के पास या प्राइवेट शिशु गृह में भेजना पड़ता है।
ऐसे अभिभावक अपने बच्चों के साथ बहुत कम समय बिता पाते हैं। शिशुगृह शुरू होने से यहां काम करने वाले कर्मचारियों व अधिकारियों की बच्चों से भौतिक दूरियां कम होगी। साथ ही वह मानसिक रूप से भी अपने बच्चों को लेकर चिंतित नहीं रहेंगे।
उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने शिशुगृह का उद्घाटन करते हुए कहा कि महिला एवं बाल विकास विभाग के इस प्रयास के कारण अभिभावक अपने बच्चों के साथ समय बिता पाएंगे। इतना ही नहीं, वह अपने बच्चों के साथ खाना खा सकेंगे। उनके साथ खेल सकेंगे और कहानियां सुना सकेंगे।
यह एक शानदार मॉडल है, जिसे हर कार्यस्थल पर अपनाया जाना चाहिए। यह बच्चे और मां दोनों के लिए बेहतरीन सिद्ध होगा। इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास विभाग के निदेशक एसबी शंशाक ने कहा कि कारपोरेट जगत को भी अपने कार्यस्थलों पर ऐसे शिशुगृह स्थापित करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।