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Delhi NCR News: कैंसर को मात देने के लिए चार अस्पतालों में डे केयर सेंटर होंगे स्थापित

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मरीजों को सेंटर पर मिलेगी कीमोथेरेपी की सुविधा व उपचार
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चिकित्सकों और नर्सिंग अधिकारियों का शुक्रवार से प्रशिक्षण हुआ शुरू

अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी को मात देने के लिए दिल्ली में डिस्ट्रिक्ट डे केयर कैंसर सेंटर स्थापित करने की कवायद शुरू हो गई है। इसके लिए दिल्ली के चार अलग-अलग अस्पतालों का चयन किया गया है जहां मरीज को कीमोथेरेपी की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। शुक्रवार से इस संबंध में दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट में चिकित्सकों और नर्सिंग अधिकारियों का प्रशिक्षण शुरू हो गया। प्रशिक्षण के लिए इंस्टीट्यूट को नोडल केंद्र बनाया गया है।

दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. दिवाकर ने बताया कि दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल, जनकपुरी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, राव तुला राम मेमोरियल अस्पताल, पंडित मदन मोहन मालवीय अस्पताल में डे केयर कैंसर सेंटर की शुरूआत की जा रही है। चिकित्सकों और नर्सों के प्रशिक्षण का जिम्मा इंस्टीट्यूट को दिया गया है। यह प्रशिक्षण चार महीने तक चलेगा। प्रशिक्षण के लिए चार बैच बनाए गए है। कीमोथेरेपी देने और उससे संबंधित दुष्प्रभाव से निपटने के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। मरीज को कीमोथेरेपी इंस्टीट्यूट में मिलेगी और आगे का उपचार सेंटर पर होगा। सेंटर स्थापित करने के लिए सभी तरह की तकनीकी सहायता अस्पतालों को उपलब्ध कराई जाएगी।
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कीमोथेरेपी देने से लेकर प्रबंधन के बारे में सीखेंगे

इंस्टीट्यूट के क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी विभाग की प्रमुख व कार्यक्रम प्रशिक्षण प्रभारी डॉ. प्रज्ञा शुक्ला ने कहा कि केंद्र सरकार ने बजट सत्र में जिलों में डे केयर कैंसर सेंटर स्थापित करने की घोषणा की थी। उसी के मद्देनजर दिल्ली में सेंटर की शुरुआत को लेकर पहल की गई है। पहले बैच में चार चिकित्सकों और चार नर्सिंग अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। नवंबर महीने तक चार अलग-अलग बैच को प्रशिक्षण मिलेगा। इसके तहत मरीज के लिए कीमोथेरेपी बनाने और उसके प्रबंधन के बारे में सीखाया जाएगा। मरीज को कीमोथेरेपी कैसे देनी है और दुष्प्रभाव पर क्या करना है उसका प्रशिक्षण दिया जाएगा।

कीमोथेरेपी के बाद नौवीं और दसवां दिन सबसे जोखिम

कीमोथेरेपी के बाद नौवां और दसवां दिन मरीज के लिए काफी जोखिम भरा होता है उससे निपटने के लिए चिकित्सकों और नर्सिंग कर्मियों को तैयार करेंगे। इमरजेंसी में किन-किन संसाधनों की जरूरत होगी उसको लेकर भी प्रशिक्षण देंगे। हालांकि, पहली कीमोथेरेपी इंस्टीट्यूट में होगी उसके बाद सेंटर मरीज का आगे का उपचार कर सकेंगे। हर मरीज का कैंसर अलग और दुष्प्रभाव कई तरह के होते है। सेंटर में उपचार मिलने से मरीजों और उनके तीमारदारों की भागदौड़ कम होगी और इंस्टीट्यूट पर मरीजों का लोड कम होगा।
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कैंसर से डरने की नहीं जागरूक होने की जरूरत

निदेशक डॉ. दिवाकर ने कहा कि कैंसर को लेकर डरने की जरूरत नहीं बल्कि जागरूक होने की आवश्यकता है जिससे आरंभिक चरण में कैंसर की पहचान कर उसका उपचार किया जा सकें। इंस्टीट्यूट की ओपीडी में रोजाना एक हजार मरीज उपचार के लिए आते है जिसमें पुरुष मरीजों में फेफड़ों और मुंह का कैंसर सबसे अधिक मिलता है। वहीं, महिलाओं में ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर के मामले अधिक है। सभी कैंसर की तीसरों और चौथी स्टेज पर उपचार के लिए आते है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में चिकित्सकों में डॉ. सतीश चंद्र यादव, डॉ. संजीव कुमार, डॉ. विनीत भारद्वाज और नर्सिंग अधिकारियों में चेतना रानी, ज्योति कुमारी, शारदा कुमारी और दीपिका गांधी ने हिस्सा लिया।
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