राष्ट्रीय महिला आयोग ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दौलत राम कॉलेज में एक असिस्टेंट प्रोफेसर पर यौन उत्पीड़न के आरोपों का स्वतः संज्ञान लिया है। यह मामला एक छात्रा के साथ तीन महीने तक लगातार उत्पीड़न से जुड़ा है। इसमें अनुचित संदेश भेजना और 27 अक्तूबर को कॉलेज परिसर में हुई एक कथित घटना शामिल है।
राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया राहटकर ने कॉलेज के प्रिंसिपल को एक पत्र लिखा है। उन्होंने पोश एक्ट, 2013' और यूजीसी के नियमों के तहत जांच का निर्देश दिया है। आयोग ने एक आंतरिक समिति से निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराने की मांग की है। कॉलेज प्रशासन से छात्रा को शैक्षणिक प्रतिशोध से सुरक्षा देने को कहा गया है। आयोग ने मनोवैज्ञानिक सहायता उपलब्ध कराने और शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखने की भी मांग की है। आयोग ने 15 दिनों के भीतर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है।
कॉलेज प्रशासन की प्रतिक्रिया
विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि छात्रा की शिकायत के बाद कार्रवाई हुई है। असिस्टेंट प्रोफेसर को छुट्टी पर भेज दिया गया है। आंतरिक शिकायत समिति इस मामले की जांच कर रही है। शिकायतकर्ता छात्रा ने प्रोफेसर पर कई अनुचित यौन संदेश भेजने का आरोप लगाया। उसने छेड़छाड़ करने की कोशिश और फेल करने की धमकी देने की बात भी कही। छात्रा ने बताया कि कथित घटना 27 अक्तूबर को हुई थी, जबकि शिकायत 29 अक्तूबर को दर्ज कराई गई थी।
शिक्षण संस्थानों में सुरक्षा
आयोग ने सभी शिक्षण संस्थानों में पोश (यौन उत्पीड़न की रोकथाम) नियमों के सख्त पालन पर जोर दिया है। इसमें एक सही तरीके से गठित और सक्रिय आंतरिक समिति का होना शामिल है। जागरूकता कार्यक्रम चलाना और शिकायत दर्ज करने की आसान व्यवस्था भी जरूरी है। आयोग ने कहा कि शिक्षण संस्थान महिलाओं के लिए सुरक्षित स्थान होने चाहिए। पोश नियमों का पालन केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि एक कानूनी जिम्मेदारी है।