सेक्टर-51 स्थित आर्टेमिस अस्पताल के डॉक्टरों पर इलाज के दौरान लापरवाही का अरोप लगा है। जिसमें न्यू कॉलोनी की रहने वाली एक महिला की मौत हो गई थी। सेक्टर-50 पुलिस ने परिजन की शिकायत पर अस्पताल के छह डॉक्टरों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज कर लिया।
वहीं जांच अधिकारी चंदगीराम ने बताया कि मामले की जांच हो रही है। अस्पताल के सीईओ डॉ. देवलीना चक्रवर्ती, मुख्य महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. गीता बरूआ, डॉ. निधि राजोतियां, डॉ. पारितोष गुप्ता (सर्जन), प्रबंध निदेशक डॉ. मजिंद्र सधूं, चिकित्सा अधिक्षक डॉ. अंजली कौल और आर्टेमिस अस्पताल के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया।
पीड़ित अशोक मक्कड़ ने पुलिस को दी लिखित शिकायत में बताया कि 20 जून 2016 को वह अपनी पत्नी की बच्चेदानी का ऑपरेशन करवाने के लिए आर्टेमिस अस्पताल ले गए थे। जिस पर डॉक्टरों ने उनकी पत्नी का लेपरोस्कॉपी से ऑपरेशन किया।
डॉक्टरों ने छेद बंद करने के लिए दो बार ऑपरेशन किए
ऑपरेशन के बाद पत्नी रजनी को दर्द होने लगा था। इसकी शिकायत डॉक्टरों से गई तो डॉ. निधि ने कहा कि उनको गैस है इसलिए दर्द हो रहा है। हल्का भोजन खाने से ठीक हो जाएगा। 24 जून को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। लेकिन दर्द कम नहीं हुआ।
29 जून को दोबारा अस्पताल में भर्ती कराया गया। तो सर्जन डॉ. पारितोष ने सीटी स्कैन करवाने के लिए कहा। जिसमें पता चला कि बच्चेदानी के ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर की लापरवाही से दो छेद हो गए थे। जिनके बंद न होने के कारण दर्द हो रहा है।
इस पर डॉक्टरों ने छेद बंद करने के लिए दो बार ऑपरेशन किए, लेकिन छेद बंद नही हुआ। रजनी की हालत और बिगडने लगी। अस्पताल में 46 दिने वेंटिलेटर पर रहने के बाद 08 अगस्त को उनकी मौत हो गई।
गूगल सर्च कर बेटी ने ढूढ़ा मां की मौत का राज
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थाना प्रभारी सुरेंद्र सिंह का कहना है कि परिजनों ने तीन अगस्त 2016 को डॉक्टरों के खिलाफ शिकायत दी थी। जिस पर पुलिस ने रोहतक पीजीआई के डॉक्टर की सलाह मांगी। सलाह के बाद पुलिस ने 04 जून 2017 रविवार को डॉक्टरों के खिलाफ मामला दर्ज किया है और जल्द ही डॉक्टरों को पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा। कानूनी कार्रवाई गकी जा रही है।
मां की मौत को बेटी प्रिंयका डॉक्टर की लापरवाही मान रही थी। इस पर वह कई बार डॉक्टर से भी मिली, लेकिन डॉक्टर ने सही जवाब नही दिया। इस पर प्रिंयका ने गूगल सर्च करना शुरू किया और विभिन्न विशेषज्ञों द्वारा राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय जर्नल में लिखे साहित्य व शोध का गहन अध्ययन किया। उसके बाद परिवार को डॉक्टर की लापरवाही का पता चला। उसके बाद पुलिस को शिकायत दी गई है। पुलिस को दी गई शिकायत में भी विभिन्न जर्नल व शोध का हवाला दिया गया है।