घर के मुखिया को बचाने के लिए एक परिवार के तीन सदस्यों ने अपनी किडनी दान कर दी। सेक्टर-128 स्थित जेपी अस्पताल में सोमवार को प्रेस वार्ता में बताया गया कि हापुड़, गढ़ मुक्तेश्वर निवासी काजल (21) ने अपनी किडनी देकर पिता की जान बचाई।
सुरेश कुमार डायबिटीज के मरीज हैं। पहली बार उनकी किडनी 2011 में बदली गई, तब उनकी मां ब्रह्मा देवी ने अपनी किडनी दी थी। उसके बाद दोबारा सुरेश की तबीयत बिगड़ गई। 2016 में उनकी पत्नी ने किडनी दान की, लेकिन दूसरी बार भी किडनी खराब हो गई।
तीसरी बार काजल ने अपनी किडनी देने का फैसला किया। किडनी ट्रांसप्लांट के संयोजक डॉ. अमित देवरा ने बताया कि पांच सालों में अब तक 500 मरीजों का किडनी प्रत्यारोपण हो चुका है।
इनमें 60 फीसदी मां, पत्नी और बेटियों ने परिजनों को किडनी दान दी है। जबकि पुरुषों की संख्या 40 फीसदी है। डॉ. मनोज लूथरा ने बताया कि किडनी मरीजों को बचाने के लिए परिवार के सदस्य अब सामने आने लगे हैं।