ऑनलाइन चलाता था ब्लैकमेल नेटवर्क
दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) अमित गोयल ने बताया कि जिले की साइबर थाना प्रभारी प्रवेश कौशिक जिस आनंद कुमार को गिरफ्तार किया है वह डेटिंग और विवाह संबंधी मंचों के माध्यम से महिलाओं को निशाना बनाकर ‘रोमांस स्कैम’, मोहपाश और ऑनलाइन ब्लैकमेल का एक संगठित नेटवर्क चला रहा था। वह महिलाओं से संपर्क करने के लिए विभिन्न सोशल मीडिया मंचों के साथ-साथ डेटिंग और विवाह संबंधी एप’ पर फर्जी पहचान के आधार पर प्रोफाइल बनाता था। खुद को एक प्रभावशाली पृष्ठभूमि वाले सुस्थापित पेशेवर व्यक्ति के रूप में पेश करता था, और भरोसा जीतने और पीड़िताओं को आकर्षित करने के लिए अक्सर खुद को डॉक्टर, व्यवसायी या फिल्म निर्माता बताता था। पुलिस उपायुक्त गोयल ने बताया कि आरोपी पीड़िताओं से दोस्त के तौर पर बातचीत शुरू करता था और धीरे-धीरे कई दिनों या हफ्तों में उनके साथ भावनात्मक संबंध बनाता था और विश्वास कायम होने के बाद वह उनके साथ निजी ‘मैसेजिंग मंचों’ पर जाकर बातचीत करता था। इन मंचों का इस्तेमाल कई मोबाइल नंबरों के जरिए किया जाता था ताकि पकड़े जाने से बचा जा सके।
ठगी के लिए गढ़ता था कहानियां
पुलिस उपायुक्त ने बताया कि आरोपी ने एक ही समय में कई पीड़िताओं से समानांतर बातचीत की। उसने भावनात्मक कमजोरियों का फायदा उठाया और पीड़िताओं को अपने भरोसे में लेने के लिए घनिष्ठता का भाव पैदा किया। पीड़िताओं का विश्वास जीतने के बाद आरोपी ने उनसे पैसे ऐंठने के लिए चिकित्सा संबंधी आपात स्थिति, कारोबार में घाटा, पारिवारिक संकट या आर्थिक तंगी जैसी मनगढ़ंत कहानियां गढ़ता था। कई मामलों में वह पीड़िताओं को लुभाने के लिए शादी या मॉडलिंग असाइनमेंट या प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश दिलाने जैसे आकर्षक अवसरों का भी वादा करता था।
एक से तो सात लाख रुपये ठग लिए
डीसीपी ने कहा कि एक मामले में वैभव अरोड़ा नाम से फर्जी प्रोफाइल बनाकर उसने एक महिला से लगभग सात लाख रुपये ऐंठ लिए। आरोपी ने पहले एक डेटिंग एप पर इस महिला से दोस्ती की और बाद में शादी का वादा किया। आरोपी ने एक और फर्जी पहचान के आधार पर आईडी बनाई और इसमें खुद को कुमार का दोस्त बताते हुए महिला से परिचय किया और दावा किया कि वह उनके रिश्ते को औपचारिक रूप में तय करने में मदद करेगा। आरोपी आनंद कुमार ने आर्थिक तंगी की झूठी कहानियां गढ़ीं और पीड़िता से पैसे ले लिए। जब पीड़िता ने अपने पैसे वापस मांगने शुरू किए, तो उसने पीड़िता को जवाब देना बंद कर दिया।
मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई
इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर इंस्पेक्टर प्रवेश कौशिक व एसआई प्रियंका की टीम ने जांच शुरू की गई। आरोपी का पता लगाने के लिए एक टीम ने धन के लेन-देन, बैंक खातों और तकनीकी विश्लेषण की छानबीन की। फिर आरोपी को पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार किया गया। जांच में यह भी पता चला कि वित्तीय धोखाधड़ी के अलावा आरोपी पीड़िताओं द्वारा साझा की गई निजी सामग्री का फायदा उठाकर जबरन वसूली भी करता था। ऑनलाइन बातचीत के दौरान वह महिलाओं को निजी तस्वीरें या वीडियो साझा करने के लिए राजी करता था और महिलाओं द्वारा पैसे देने से इनकार करने पर इनको सार्वजनिक करने की धमकी देता था।
कई राज्यों में महिलाओं से बात करता था
पूछताछ में एसआई प्रिंयका को पता लगा कि वह एक साथ फर्जी पहचानों के आधार पर कई सोशल मीडिया प्रोफाइल चला रहा था और कई राज्यों में पीड़िताओं के साथ संवाद कर रहा था। तकनीकी विश्लेषण से पता चला है कि आरोपी ने 500 से अधिक महिलाओं को निशाना बनाया था और उनसे लगभग दो करोड़ रुपये की धोखाधड़ी या जबरन वसूली की थी। दिल्ली और गाजियाबाद में भी इसी तरह के मामलों में उसकी संलिप्तता रही है।
ऐसे करता था ठगी
आरोपी ने व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम, फेसबुक और स्नैपचैट जैसे अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर, और कई डेटिंग शादी-ब्याह वाली एप पर नकली प्रोफाइल बनाईं। उसने बहुत सोच-समझकर संभावित शिकार चुने ज़्यादातर महिलाएं और खुद को एक पेशेवर (जैसे डॉक्टर, कारोबारी, वकील या फ़िल्म प्रोड्यूसर) बताकर उनसे बातचीत शुरू की। धीरे-धीरे भावनात्मक भरोसा बनाया और लंबे समय तक पीड़ितों के साथ वर्चुअल रिश्ते बनाए। पीड़ितों का भरोसा जीतने के बाद उसने पैसे ऐंठने के लिए झूठी स्थितियां खड़ी कीं जैसे आर्थिक संकट, मेडिकल इमरजेंसी, कारोबार में नुकसान या परिवार की कोई अचानक जरूरत। कई मामलों में उसने पीड़ितों को फंसाने के लिए शादी का वादा किया या मॉडलिंग असाइनमेंट या किसी जाने-माने शिक्षण संस्थान में दाखिले जैसे पेशेवर मौकों का लालच दिया।
निजी फोटो और वीडियो भी जमा किए
आरोपी ने ऑनलाइन बातचीत के दौरान पीड़ितों द्वारा शेयर की गई निजी फोटो और वीडियो भी जमा कर लिए। बाद में इन चीजों का इस्तेमाल करके पीड़ितों को सोशल मीडिया पर उन्हें बेनकाब करने की धमकी दी। उसने अपनी पहचान छिपाने और कानून लागू करने वाली एजेंसियों की पकड़ से बचने के लिए कई मोबाइल फोन, अलग-अलग पहचान पर जारी किए गए सिम कार्ड और कई नकली खातों का इस्तेमाल किया।