पीड़िता के वकील प्रदीप तिवारी ने खंडपीठ के समक्ष कहा था कि युवती ने अपनी शिकायत 7 जून 2018 को फतेहपुर बेरी थाने में दी थी। इसकी एफआईआर पुलिस ने तीन दिन बाद 10 जून को दर्ज की थी। इसके बाद भी पुलिस ने दाती को पूछताछ के लिए आठ दिन का समय दिया, लेकिन वह नहीं आया।
पुलिस ने उसके आश्रमों पर छापेमारी की, लेकिन वह नहीं मिला। वह पुलिस के पास आया तो पुलिस ने जांच में सहयोग करने के नाम पर उसे गिरफ्तार नहीं किया। यह दुष्कर्म का मामला है और दाती की इसमें फौरन गिरफ्तारी होनी चाहिए थी।
दिल्ली पुलिस ने चार्जशीट में कहा है कि दाती महाराज और अन्य आरोपियों को गिरफ्तार करने लायक साक्ष्य जांच के दौरान नहीं मिले हैं। यह चार्जशीट केवल पीड़िता के पुलिस व कोर्ट को दिए बयान के आधार पर दाखिल की गई है। चार्जशीट में आरोपियों, उनके सहयोगियों और अन्य लोगों के मोबाइल रिकॉर्ड की फोरेंसिक रिपोर्ट भी दाखिल की गई है। इसमें कई अहम जानकारियां सामने आने का दावा पुलिस ने किया है।