फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दाती महाराज की पुनर्विचार याचिका पर फैसला सुरक्षित, दुष्कर्म मामले की CBI जांच के खिलाफ पहुंचा था HC

Fri, 02 Nov 2018 08:05 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
दाती महाराज
विज्ञापन

शिष्या से दुष्कर्म के आरोपी दाती महाराज मदन लाल राजस्थानी की याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने शुक्रवार को फैसला सुरक्षित रख लिया। हाईकोर्ट ने इस मामले की जांच सीबीआई को दी थी। इस पर दाती महाराज ने याचिका दायर कर कहा था कि हाईकोर्ट ने उसका पक्ष जाने बिना ही सीबीआई जांच का निर्देश दे दिया। 

विज्ञापन


पीड़िता ने दिल्ली पुलिस की जांच पर सवाल उठाते हुए सीबीआई जांच की मांग की थी। दिल्ली पुलिस ने दाती महाराज और उसके तीन भाइयों को गिरफ्तार किए बिना ही एक अक्तूबर को चार्जशीट दाखिल की थी। इस चार्जशीट पर शनिवार को साकेत जिला अदालत में सुनवाई होनी है।

हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन व न्यायमूर्ति वीके राव की खंडपीठ के समक्ष दाती महाराज के वकील ने कहा कि इस मामले में दिल्ली पुलिस चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। इस पर संज्ञान लिया जाना है। पुलिस की जांच से निचली अदालत सहमत नहीं होती तो वह आगे जांच या दोबारा जांच का निर्देश दे सकती है। 
विज्ञापन


इसलिए इस मामले में सीबीआई जांच की फिलहाल कोई जरूरत नहीं थी। सीबीआई ने 30 अक्तूबर को रिपोर्ट दाखिल कर कहा था कि वह इस मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर चुकी है। हाईकोर्ट ने तीन अक्तूबर को जांच सौंपते हुए सीबीआई को तीन माह के भीतर पूरक आरोप पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया था।

विज्ञापन

पुलिस ने उसके आश्रमों पर छापेमारी की

पीड़िता के वकील प्रदीप तिवारी ने खंडपीठ के समक्ष कहा था कि युवती ने अपनी शिकायत 7 जून 2018 को फतेहपुर बेरी थाने में दी थी। इसकी एफआईआर पुलिस ने तीन दिन बाद 10 जून को दर्ज की थी। इसके बाद भी पुलिस ने दाती को पूछताछ के लिए आठ दिन का समय दिया, लेकिन वह नहीं आया।

पुलिस ने उसके आश्रमों पर छापेमारी की, लेकिन वह नहीं मिला। वह पुलिस के पास आया तो पुलिस ने जांच में सहयोग करने के नाम पर उसे गिरफ्तार नहीं किया। यह दुष्कर्म का मामला है और दाती की इसमें फौरन गिरफ्तारी होनी चाहिए थी।

दिल्ली पुलिस ने चार्जशीट में कहा है कि दाती महाराज और अन्य आरोपियों को गिरफ्तार करने लायक साक्ष्य जांच के दौरान नहीं मिले हैं। यह चार्जशीट केवल पीड़िता के पुलिस व कोर्ट को दिए बयान के आधार पर दाखिल की गई है। चार्जशीट में आरोपियों, उनके सहयोगियों और अन्य लोगों के मोबाइल रिकॉर्ड की फोरेंसिक रिपोर्ट भी दाखिल की गई है। इसमें कई अहम जानकारियां सामने आने का दावा पुलिस ने किया है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें