इहबास के अध्ययन में खुलासा
अमर उजाला ब्यूरो
पूर्वी दिल्ली। मानव व्यवहार एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान (इहबास) के अध्ययन में सामने आया है कि नियमित शारीरिक गतिविधि बुजुर्गों को इस स्थिति से बचाने में मदद कर सकती है।
अध्ययन के अनुसार, बुजुर्गों में शारीरिक कमजोरी के साथ याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता घटने पर गिरने, अस्पताल में भर्ती होने और रोजमर्रा के कामों के लिए दूसरों पर निर्भर होने का खतरा बढ़ जाता है। इससे उनकी जीवन गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है।
शोधकर्ता गीता ज्योति ओझा और इहबास के मनोचिकित्सा विभाग के प्रोफेसर डॉ. ओम प्रकाश ने इस विषय पर हुए अलग-अलग अध्ययनों की समीक्षा की। इसके लिए पबमेड, स्कोपस और कोक्रेन जैसे शोध डेटाबेस में उपलब्ध अध्ययनों का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने बताया कि बुजुर्गों को स्वस्थ रहने के लिए कठिन व्यायाम की जरूरत नहीं है। रोजाना टहलना, हल्की एरोबिक्स, संतुलन सुधारने वाले व्यायाम और घर के सामान्य कामकाज में सक्रिय रहना भी फायदेमंद हो सकता है। नियमित शारीरिक गतिविधि शरीर को सक्रिय रखने के साथ मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी है।
इलाज के साथ व्यायाम पर भी जोर
डॉ. ओम प्रकाश ने बताया कि बुजुर्गों की देखभाल में केवल दवाओं पर निर्भर रहने के बजाय उनकी शारीरिक गतिविधियों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। अस्पतालों और पुनर्वास केंद्रों में बुजुर्गों की उम्र और क्षमता के अनुसार व्यायाम और गतिविधियों की योजना बनाई जा सकती है। उनके मुताबिक, रोजमर्रा की दिनचर्या में शारीरिक गतिविधि को शामिल करने से बुजुर्ग लंबे समय तक सक्रिय और आत्मनिर्भर बने रह सकते हैं।