दादरी के बिसाहड़ा गांव में गोमांस खाने के शक में मारे गए इकलाख मर्डर मामले में पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है।
इस मामले में विशाल और शिवम को गिरफ्तार कर लिया गया है। अब तक इस मामले में आठ लोगों को गिरफतार किया जा चुका है।
बीजेपी कार्यकर्ता का बेटा इकलाख हत्याकांड का मुख्य आरोपी निकला। पुलिस ने शुक्रवार रात मुखबिर की सूचना पर विशाल और शिवम को गिरफ्तार कर लिया।
विशाल भारतीय जनता पार्टी की जिला कार्यकारिणी के सदस्य संजय सिंह राणा का पुत्र है। खास बात यह है कि गिरफ्तार होने वाले आठ आरोपियों में से छह आरोपी एक ही खानदान से ताल्लुक रखते हैं।
पुलिस की प्रथम दृष्टया जांच में आया है कि विशाल और शिवम ने ही पुजारी को धमकाकर माइक से पशुवध की सूचना प्रसारित करने को कहा था। इसके बाद लोगों के इकट्ठा होने का दौर शुरू हुआ था।
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टाइफाइड से पीड़ित थे विशाल और शिवम
शुक्रवार देर रात तीन बजे मुखबिर की सूचना पर विशाल और शिवम को गिरफ्तार किया गया है। अभी तक पकड़े गए आरोपियों में विशाल पुत्र संजय सिंह राणा, शिवम पुत्र मुकेश, सौरव व गौरव पुत्र धीरज और सुमित पुत्र ओमवीर और रूपेश एक खानदान के हैं।
वहीं, आरोपियों के पिता संजय सिंह राणा, मुकेश, धीरज और ओमवीर आपस में भाई हैं। इसके अलावा रूपेश संजय सिंह के ताऊ का पोता है। एक ही खानदान के छह आरोपियों के पकड़े जाने से घटना में दुश्मनी की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता है।
गांववासियों का कहना है कि विशाल और शिवम टाइफाइड से पीड़ित हैं। उन्होंने दावा किया कि पुलिस ने उनको पकड़ा नहीं बल्कि वह स्वयं पुलिस के समक्ष हाजिर हुए हैं।
‘बेटे और भतीजे को मैंने पुलिस को सौंपा’
पुलिस ने शनिवार को बिसाहड़ा गांव में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। हालांकि गिरफ्तार एक आरोपी के पिता और एक पार्टी के सदस्य संजय राणा का कहना है कि मैंने खुद अपने बेटों व भतीजों को पुलिस को सौंपा है। उनकी गिरफ्तारी नहीं हुई है।
उनका कहना है कि पुलिस पुजारी के सामने दोनों को लाकर दिखा दे या पुलिस यह पता कर ले कि वह दोनों घटना स्थल पर थे या नहीं। पुलिस अपनी ओर से पूरी जांच कर लें।
अगर यह साबित हो जाता है कि उनके बेटे और भतीजे घटनास्थल पर मौजूद थे और पुजारी की ओर से उनके होने की पुष्टि हो जाती है तो उन पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।
उनका कहना है कि मैं गलती से एक पार्टी का सदस्य हूं और उसकी भूमिका बनाकर लोग नई-नई कहानी गढ़ रहे हैं। इसमें पार्टी की कहीं कोई भूमिका नहीं है।
नेताओं के विरोध में सड़क पर आए गांववाले
इस बीच बिसाहड़ा में नेताओं के पहुंचने और मीडिया के जमावड़े से स्थानीय लोग नाराज हो गए और सड़क पर आ गए। शनिवार को गांव के लोग इतने उग्र हो गए कि उन्होंने मीडिया को भी निशाना बनाया और उनकी गाड़ियां तोड़ दीं।
आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल भी शनिवार सुबह पीड़ित परिवार से मिलने बिसाहड़ा गांव पहुंचे और वो भी गांव वालों के प्रकोप का शिकार बने।
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने न सिर्फ केजरीवाल को सुबह इकलाख के घर जाने से मना कर दिया बल्कि मीडिया के भी इस गांव में प्रवेश पर पाबंदी लगा दी।