अदालत ने दुष्कर्म मामले में दाती महाराज और उनके सौतेले भाइयों के खिलाफ दिल्ली पुलिस की चार्जशीट पर शुक्रवार को संज्ञान नहीं लिया। अदालत ने इस मामले में पुलिस की जांच पर गहरा असंतोष जाहिर किया है। दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने एक अक्तूबर को चार्जशीट दाखिल की थी।
साकेत जिला अदालत की सीएमएम पूजा तलवार ने दिल्ली पुलिस की जांच पर नाराजगी जाहिर करते हुए शुक्रवार को चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इंकार कर दिया। हाईकोर्ट में सीबीआई की जांच के मामले में 30 अक्तूबर को रिपोर्ट पेश की जानी है। निचली अदालत ने हाईकोर्ट के अगले आदेश तक चार्जशीट पर सुनवाई स्थगित करते हुए तीन नवंबर की तारीख तय की है।
हाईकोर्ट ने पीड़िता की याचिका पर सुनवाई के बाद केस की जांच सीबीआई को देते हुए विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था। पीड़िता का आरोप था कि दिल्ली पुलिस दाती मदनलाल राजस्थानी के प्रभाव के कारण मामले में लीपापोती कर रही है। दाती और अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से उसकी जान को लगातार खतरा बना हुआ है।
दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने चार्जशीट में कहा कि दाती महाराज व अन्य आरोपियों को गिरफ्तार करने लायक साक्ष्य जांच के दौरान नहीं मिले हैं। यह चार्जशीट केवल पीड़िता के पुलिस व कोर्ट को दिए बयान के आधार पर दाखिल की गई है। इस चार्जशीट में आरोपियों, उनके सहयोगियों व अन्य लोगों के मोबाइल रिकार्ड की फोरेंसिक रिपोर्ट दाखिल की है।
पीड़िता का आरोप है कि वह 2005 में दाती महाराज के संपर्क में आई थी। दाती उसके कॉलेज का खर्च भी उठाता था। दो साल पहले चरण सेवा के नाम पर नौ जनवरी 2016 को दाती महाराज ने फतेहपुर बेरी स्थित आश्रम में शनि अमावस्या को उसके साथ दुष्कर्म किया। इस बाबत पीड़िता ने 10 जून 2018 को दाती महाराज व उसके भाइयों के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म की एफआईआर दर्ज करवाई थी। इसके बाद पीड़िता ने मामले की सीबीआई जांच के लिए 17 जुलाई को हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।