आईएफएसओ के डीसीपी केपीएस मल्होत्रा ने बताया कि सोशल मीडिया पर निगरानी के दौरान टीम की नजर विक्रमशिला यूनिवर्सिटी के नाम पर बनी एक संदिग्ध वेबसाइट पर गई। वेबसाइट के जरिए लोगों को नौकरी दिलवाने के अलावा निवेश का झांसा देकर रुपये लेने की बात सामने आई। यूनिवर्सिटी का रजिस्टर्ड कार्यालय इरोज बिल्डिंग, नेहरू प्लेस में होने का दावा किया जा रहा था। साथ ही ये भी दावा किया जा रहा था कि यूनिवर्सिटी भारत की पहली 100 फीसदी डिजिटल यूनिवर्सिटी है।
इसके अंतर्गत मेडिकल, इंजीनियरिंग, डेंटल और एग्रीकल्चर कॉलेज हैं। यूनिवर्सिटी का 500 एकड़ से अधिक में कैंपस है। जहां 300 से ज्यादा अलग-अलग कोर्स चलाए जाते हैं। यूनिवर्सिटी के चार कैंपस बांका, नोएडा, मुंबई व कोच्चि में मौजूद हैं। इन कैंपस में पांच हजार से ज्यादा रिक्त पद हैं। इन पदों को भरने के लिए वेबसाइट पर 500 रुपये लेकर फार्म भरवाया जा रहा है। पैसे यूनिवर्सिटी के कथित खाते में मंगवाए जा रहे हैं। संदेह होने पर इसकी जांच की गई तो यूनिवर्सिटी के फर्जी होने का पता लगा। जानकारी मिली कि इस तरह की कोई भी यूनिवर्सिटी नहीं है। पुलिस ने स्वत: संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज कर लिया। इसके बाद एसीपी संजीव भंडारी की देखरेख में एसआई अशोक और हवलदार जितेंद्र की टीम ने जांच शुरू की। जांच के बाद टीम ने अमरदीप सिंह को गिरफ्तार कर लिया।
लगा रखे थे राष्ट्रपति व राजनेताओं को लैटर हैड
आरोपी ने पूछताछ में बताया कि उसने विक्रमशिला यूनिवर्सिटी की फर्जी वेबसाइट वर्ष 2015 में बनाई थी। इस वेबसाइट पर पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद व बड़े राजनेताओं के लैटर हैड डाल रखे थे। ताकि इन लैटर हैड को देखकर लोग वेबसाइट को असली समझें। वह यूनिवर्सिटी के कैंपस में बिल्डर व निवेशकों से निवेश करने के लिए कहता था। इस तरह उसने गुजरात की एक निर्माण कंपनी से निवेश के नाम पर 1.50 करोड़ रुपये ठग लिए थे।